चित्रकूट। तीर्थस्थानों के विकास के लिए श्री चित्रकूट तीर्थ विकास प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है। इससे उम्मीद बनी है कि अब अयोध्या व वाराणसी की तर्ज पर चित्रकूट धार्मिक क्षेत्र का विकास होगा। बुधवार को जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाए गए हैं।
यूपी में चित्रकूट व विंध्याचल के विकास के लिए प्रदेश सरकार ने पहल की है। यह प्राधिकरण एकल संस्था की तरह कार्य करेगी। जिसमें योजनाएं बनाने, क्रियान्वयन कराने सहित अन्य कार्य की जिम्मेदारी दी गई है। चित्रकूट तीर्थ स्थान का विकास होने की आस बढ़ गई है। पहले भी यूपी सरकार ने चित्रकूट क्षेत्र में तहबाजारी व परमिट शुल्क खत्म किया है। जिले के पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह ने बताया कि बनाया गया प्राधिकारण एक एकल संस्था की तरह काम करेगा। प्राधिकरण को एक करोड़ रुपये तक चंदा लेने का अधिकार दिया गया है।
इन क्षेत्रों का होगा विकास
प्राधिकरण से चित्रकूट तीर्थ स्थान के अलावा वाल्मीकि आश्रम, संत तुलसीदास की जन्म स्थली राजापुर, ऋषियन आश्रम, मड़फा आश्रम, नांदिन के हनुमान मंदिर, लैना बाबा तीर्थ स्थान, नांदिन के हनुमान तीर्थ स्थल सहित अन्य तीर्थ स्थानों का विकास हो सकेगा।
ये होंगे सदस्य
श्री चित्रकूट तीर्थ विकास प्राधिकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अध्यक्ष, पर्यटन मंत्री उपाध्यक्ष, विभिन्न विभागों के मुख्य सचिव व चित्रकूट जिले के पुलिस अधीक्षक पदेन सदस्य, चित्रकूट जिले के नगर निकाय के अध्यक्ष भी सदस्य होंगे।
वर्जन
प्रभु श्रीराम की तपोस्थली का विकास अयोध्या, काशी की तर्ज पर किया जाएगा। पूर्व में पर्यटन विभाग के माध्यम से विकास कराए जाते रहे हैं। पर्यटन का क्षेत्र अधिक होने के चलते विकास में विलंब होता था। ऐसे में मुख्यमंत्री ने धार्मिक क्षेत्रों के विकास के लिए अलग बोर्ड का गठन कर खुद कमान संभाली है। चित्रकूट के विकास के लिए धार्मिक स्थलों का निरीक्षण कर रूपरेखा भेजेंगे। अब तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से विकास का बजट आएगा। - शुभ्रांत कुमार शुक्ला, चित्रकूट तीर्थ विकास परिषद के पहले सीईओ