फोटो नंबर- 1- खेत में जानकारी लेते भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्रा?
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चित्रकूट। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि भूमि और वर्षा के प्रभावी प्रयोग से किसानों को टिकाऊ आय देने के लिए फसल पद्धतियों की पहचान की जाए। इसके साथ ही खेती में किसान जैविक व प्राकृतिक तरीकों कोे अपनाएं।
उन्होंने कहा कि कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से स्थिति और बिगड़ती जा रही है। पोषण और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए नैनो प्रौद्योगिकी और मृदा गुणवत्ता जांच के लिए बायोसेंसर का विकास भी किया जाए। फिर उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की टीम के साथ दीनदयाल शोध संस्थान से संचालित बंदरकोल प्रक्षेत्र का भ्रमण किया। चने एवं सरसों की 10-10 प्रजातियों के प्रदर्शन परीक्षणों का अवलोकन किया। बीज उत्पादन के लिए लगाई गई सरसों की परंपरागत प्रजाति देशी लाहा का अवलोकन कर आईसीएआर के महानिदेशक ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाए बिना स्थानिक कम लागत की पर्यावरण हितैषी संरक्षण और प्रबंधन प्रौद्योगिकी का विकास कर कृषि उत्पादकता को बढ़ाया जाए।
कृषि वैज्ञानिक सत्यम चौरिहा ने बताया कि खेती के आधुनिकीकरण के कारण बीजों के लिए किसान बीज कंपनियों पर निर्भर होते जा रहे हैं। साथ ही कंपनियां बीजों के रखरखाव के लिए विविध प्रकार के रसायनों का प्रयोग कर रही हैं। इस दौरान संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन व कोषाध्यक्ष वसंत पंडित सहित कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक मौजूद रहे।