मोहर्रम पर्व पर चितरा सीतापुर में निकाले गये ताजिये और ढोल पीटते अकीदतमंद। संवाद
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चित्रकूट/खोही। पैगम्बर-ए- इस्लाम के नवासे हुसैन और उनके कुनबे के 72 साथियों की शहादत की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम के 10 दिवसीय आयोजन खत्म हो गए। शुक्रवार को 10वीं मोहर्रम मनाया गया। पहली मोहर्रम को तैयार किये गए ताजिये, ढाल अलम आदि को प्रतीकात्मक कर्बला मंदाकिनी नदी किनारे ले जाकर गड्ढे खोदकर दफन कर दिया गया।
मोहर्रम त्योहार को परंपरागत तरीके से शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मनाया गया। कई स्थानों पर ताजियों को इमामबाड़ों के अंदर निकाला गया। जिसको देखने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम परिवार सहित पहुुंचे। इस बार मोहर्रम के त्योहार को कोरोना काल के नियमों के तहत मनाया गया। मुस्लिमों के मोहर्रम पर्व का समापन शुरुवार को हुआ। जिसमें शहर सहित जिले के मानिकपुर, राजापुर, मऊ, भरतकूप क्षेत्र में इमामबाड़ों में ताजिया निकाला गया। जिसको देखने के लिए मुस्लिम परिवार सहित पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस तैनात रही।