फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chitrakoot News: 100 मीटर चौड़ी हरित पट्टी से सजेंगे मंदाकिनी के दोनों किनारे

Sun, 09 Aug 2026 10:38 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
विज्ञापन
फोटो 09 सीकेटीपी 04 मंदाकिनी नदी का दृश्य। आर्काइव।
विज्ञापन
चित्रकूट। धर्मनगरी की पहचान मंदाकिनी नदी अब हरियाली की चादर ओढ़ेगी। महायोजना 2031 के तहत नदी के दोनों किनारों पर 100 मीटर चौड़ा ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसकी कार्ययोजना शासन को मंजूरी के लिए भेजी जा चुकी है।
विज्ञापन

मंदाकिनी नदी चित्रकूट की जीवनरेखा माना जाता है। यह नदी यहां की करीब 70 फीसदी आबादी को पीने का पानी देती है। साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी मुहैया कराती है। हालांकि, वर्तमान में यह नदी गंभीर प्रदूषण और अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। शहर के कई गंदे नाले सीधे नदी में मिलते हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। गर्मियों में नदी का जलस्तर काफी कम हो जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने वनवास काल में यहां स्नान किया था। अमावस्या और दीपावली जैसे अवसरों पर लाखों भक्त इसमें आस्था की डुबकी लगाते हैं।
विज्ञापन


मंदाकिनी नदी मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां के पिंडरा गांव के पास की खिल्लोरा पहाड़ियों से एक मौसमी जलधारा के रूप में निकलती है। चित्रकूट में सती अनुसूइया आश्रम के पास बारहमासी स्रोतों से पानी मिलने के बाद यह एक पवित्र नदी बन जाती है। यह नदी करीब 108 किमी की दूरी तय कर जिले के राजापुर क्षेत्र के कनकोटा गांव के पास यमुना नदी में मिल जाती है।
उधर, पिछले 10 साल में मंदाकिनी के किनारे अवैध कब्जे और निर्माण बढ़े हैं। वन विभाग के अनुसार हरित पट्टी से भू-कटाव रुकेगा, भूजल रिचार्ज होगा और तापमान 2-4 डिग्री तक कम होगा। प्रदूषण और मृदा का क्षरण कम होगा। जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

योजना में क्या-क्या होगा
- 100 मीटर ग्रीन बेल्ट : नदी के दोनों किनारों पर अर्जुन, जामुन, हरिशंकरी, बांस, औषधीय पौधे लगेंगे।
- घाटों का सुंदरीकरण : 52 घाटों को थीम के आधार पर विकसित किया जाएगा।
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट : नदी में गंदा पानी जाने पर रोक।

वर्जन
पावन पवित्र मंदाकिनी नदी को निर्मल और हरा भरा बनाने के लिए महायोजना 2031 में इसे हरित पट्टी में शामिल किया गया है। इस नदी को संवारने के काम किए जाएंगे। नदी के दोनों तरफ 100 मीटर चौड़ी कर उस पर पौधे रोपे जाएंगे। जिससे लोग प्राकृतिक सुंदरता की अनुभूति कर सके।- पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें