चित्रकूट। जिले के छह सीएचसी में से चार में केमिकल न होने से खून की जांच नहीं हो रही है।
कंपलीट ब्लड काउंट (सीबीसी) जांच के लिए मरीजों को प्राइवेट पैथोलॉजी में तीन सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि सीएचसी में यह जांच निशुल्क होती है। मानिकपुर में डेढ़ साल से केमिकल न होने से जांच नहीं हो रही है। वहीं, अन्य सीएचसी में भी महीनों से जांच बाधित है।
जिले में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहाड़ी, रामनगर, मऊ, मानिकपुर, राजापुर, शिवरामपुर में हैं। इनमें से पहाड़ी, मऊ, मानिकपुर, शिवरामपुर में सीबीसी जांच नहीं हो रही है। फिलहाल जिला अस्पताल, राजापुर और रामनगर सीएचसी में सीबीसी जांच हो रही है।
शिवरामपुर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. शैलेश कुमार, पहाड़ी सीएचसी के प्रभारी डॉ. उदय प्रताप सिंह व मऊ सीएचसी के अधीक्षक डॉ. धर्मराज सिंह ने बताया कि सीबीसी मशीन उपलब्ध है। केमिकल न होने से सीबीसी जांच नहीं हो पा रही है। केमिकल की डिमांड उच्चाधिकारियों से की गई है। वहीं, मानिकपुर सीएचसी अधीक्षक राजेश सिंह ने बताया कि डेढ़ साल से केमिकल नहीं है। इससे यहां खून की जांच नहीं हो पा रही है।
खून की 20 प्रकार की होती हैं जांचें
डॉक्टरों के मुताबिक सीबीसी मशीन की मदद से खून की करीब 20 प्रकार की जांचें की जाती हैं। इसमें हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स सबसे महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ ही आरबीसी, एमसीएच, समेत कई अन्य जांचें भी हैं। सीबीसी में खून में मौजूद कोशिकाओं की गिनती होती है। इसमें ब्लड में मौजूद लाल और सफेद रक्त कणिकाओं की संख्या व उनका आकार देखा जाता है।
बुखार के लिए महत्वपूर्ण है सीबीसी जांच
सीबीसी जांच बुखार के लिए महत्वपूर्ण होती है। बुखार के कारण ही ब्लड काउंट घटने लगता है। प्लेट्लेट्स की कमी होने लगती है। सीबीसी जांच में यह कमी पकड़ में आ जाती है। डॉक्टर इसी जांच के आधार पर इलाज करते हैं। सोमवार की रात स्तुति की बुखार से मौत हुई थी। इसे बुखार आने पर सीएचसी मानिकपुर में भर्ती कराया गया था। चार दिन के इलाज में इसकी भी सीबीसी जांच बाहर से कराई गई थी।
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सभी सीएचसी में खून की जांच की मशीनें हैं। कुछ जगह से रिजेंट केमिकल न होने की जानकारी मिली है। केमिकल भेजकर वहां जल्द ही सीबीसी जांच की सुविधा बहाल कराई जाएगी। जिला अस्पताल में सारी जांचें हो रही हैं। - भूपेश द्विवेदी, सीएमओ