फोटो 28 सीकेटीपी-04-तहसील राजापुर स्थित बड़ा तालाब
चित्रकूट। जल संरक्षण के लिए सरकार ने दो तालाबों को राज्य संरक्षित वेटलैंड घोषित किया है। वन एवं वन्यजीव विभाग व शासन से जारी अधिसूचना के बाद दोनों जल निकायों को विशेष संरक्षण प्राप्त होगा और 50 मीटर के दायरे में अतिक्रमण व प्रदूषण पर रोक लगेगी। शासन के इस फैसले को चित्रकूट की पारिस्थितिकी, जैव विविधता और जल सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
जिले के बड़ा तालाब और सिंघानिया तालाब में प्रवासी पक्षियों व स्थानीय जलचरों के लिए महत्वपूर्ण आवास स्थल हैं। हर वर्ष शीत ऋतु में यहां साइबेरियन क्रेन, पेंटेड स्टॉर्क समेत 40 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों का आगमन होता है। पर्यावरणविदों के अनुसार यह क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध माना जाता है। बड़ा तालाब लगभग 3.7980 हेक्टेयर व सिंघानिया तालाब 8.3450 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है।
यह दोनों जल निकाय भू-जल रिचार्ज, स्थानीय कृषि और जलापूर्ति के प्रमुख स्रोत के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वेटलैंड घोषित किए जाने के बाद अब दोनों तालाबों की 50 मीटर परिधि में अतिक्रमण, ठोस एवं औद्योगिक अपशिष्ट का निस्तारण, भूमि उपयोग परिवर्तन और अवैध मत्स्य आखेट पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
प्रशासन द्वारा इन क्षेत्रों की नियमित निगरानी भी की जाएगी। इससे वेटलैंड की प्राकृतिक संरचना और जैव विविधता सुरक्षित रह सके। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि वेटलैंड संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। बड़ा तालाब और सिंघानिया तालाब को संरक्षित दर्जा मिलने से चित्रकूट की पर्यावरणीय स्थिति और जल संरक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।