फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मारा गया बलखड़िया!

Sat, 11 Jul 2015 11:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीहड़ के हालात, एसपी की आशंका और परिजनों के बयान से तो यही लगता है कि बुंदेलखंड और आसपास के जिलों में पुलिस व पब्लिक की नाक में दम किए साढ़े छह लाख का इनामी डकैत बलखड़िया मारा जा चुका है। यह बात अलग है कि उसकी लाश न मिलने से इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी है। बीहड़ में एक चर्चा यह भी कि बलखड़िया मारा गया है, पर पुलिस की नहीं, अपने ही साथी की गोली से उसकी मौत हुई है।
विज्ञापन


गौरतलब है कि 2 जुलाई को मारकुंडी थाना क्षेत्र के कोलान में कुख्यात डकैत स्वदेश पटेल उर्फ बालखड़े उर्फ बलखड़िया गैंग की पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई थी। इसमें गोली लगने से तीन सिपाही जख्मी हुए थे। इसके बाद एसपी पवन कुमार ने कहा था-‘बलखड़िया को गोली तो लगी है, पर अभी तक गैंग का कोई ताजा मूवमेंट न मिलने से सब कुछ संदेह के घेरे में है’।

 दूसरी ओर पुलिस का एक वर्ग यह भी मानता है कि बलखड़िया इतना शातिर है कि अपनी मौत की अफवाह खुद फैला सकता है, ताकि पुलिस निश्चिंत हो जाए और वह आराम से इलाज करा सके।
विज्ञापन

इस बीच पूछताछ के लिए कोतवाली लाए गए बलखड़िया के भतीजे बरुई निवासी पुष्पेंद्र पुत्र ज्वाला प्रसाद ने बताया कि उसके परिवार का ही एक युवक खच्चू पुत्र चुन्नीलाल भी गैंग के साथ रहता है। गत 4 जुलाई की शाम लगभग 7 बजे उसके मोबाइल पर खच्चू का फोन आया। इसमें उसने कहा कि गांव के पास जंगल आ जाओ, साथ में फूलचंद्र पुत्र रामरतन (परिजन) को भी लेकर आना।

जब वह बरुई गांव के पास जंगल में पहुंचा तो खच्चू ने उसे मोबाइल में बलखड़िया की मृत अवस्था की वह फोटो दिखाई, जिसमें उसके सीने में गोली लगी थी और उसके आसपास गिरोह के सदस्य गमगीन बैठे थे। उसके अनुसार, खच्चू ने बताया कि पुलिस की मुठभेड़ में काफी देर गोली चली और बलखड़िया को गोली लगी है। उसे जैसे-तैसे लेकर जंगल की ओर भागे। इलाज न होने की वजह से बलखड़िया की मौत हो गई और गैंग ने उसका दाह संस्कार भी कर दिया।

बलखड़िया की मौत उसके साथी की गोली से होने की चर्चा को इससे भी बल मिलता है कि जब जब बड़े डकैत गिरोहों का अंत हुआ है, उसके पीछे कहीं न कहीं उनके अति नजदीकी या गैंग मेंबरों का हाथ रहा। चाहे तीन दशक तक जिले में दहशत फैलाने वाले ददुआ उर्फ शिवकुमार पटेल का इतिहास रहा हो या फिर ठोकिया की मौत। दोनों ही बड़े गैंगों के सफाए में गैंग के ही नजदीकी ने अहम भूमिका निभाई थी।

 यह बात अलग है कि इसका श्रेय पुलिस ने लिया था। ददुआ के सफाए में गैंग के नजदीकी युवक ने एसटीएफ का साथ दिया था और रिमोट बम से गैंग का सफाया हुआ था। इसी तरह ठोकिया गैंग में रहने वाले ज्ञान सिंह ने ठोकिया को गोली मारी थी। अब बलखड़िया के बारे में भी ऐसी ही चर्चाएं हैं। बताया जाता है कि गोली मारने के बाद गैंग का वह सदस्य वापस गिरोह में नहीं गया। गिरोह के अन्य सदस्य घायल बलखड़िया को लेकर जंगल गए और वहां बलखड़िया के परिजनों को बुलाया गया। इसके बाद क्या हुआ, पता नहीं।

लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक लाश नहीं मिलती या उसका कोई अवशेष नहीं मिलता, कागजों में बलखड़िया जिंदा ही रहेगा। एसपी पवन कुमार का कहना है कि अगर बलखड़िया के मारे जाने के ठोस सबूत मिले तो वह बाकायदा प्रेसवार्ता बुलाएंगे। उधर, बलखड़िया के गांव बरुई लखनपुर और आसपास पसरा एक अजीब सा सन्नाटा और गांववालों की चुप्पी से भी बलखड़िया के मारे जाने की बात सही लगती है। पुलिस भी बलखड़िया के गांव बरुई लखनपुर और आसपास बराबर टोह ले रही है। लोगों से पूछताछ भी कर रही है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें