चित्रकूट। संरक्षित जानवरों की खाल, दांत और अन्य अंगों को बेचकर अच्छी खासी कीमत वसूलने के लिए जंगल क्षेत्र में इनका कत्लेआम किया जा रहा है। सती अनुसुइया जंगल में तेंदुए को करंट लगाकर मारने की घटना ने वन विभाग और वन्य जीव प्रतिपालक विभाग के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी भरकम टीम लगाकर जंगली जानवरों की सुरक्षा का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि शिकारी तरह तरह से संरक्षित जीवों की हत्या कर रहे हैं। बांदा के अफसरों की ओर से जिंदा गायों को मध्यप्रदेश के जंगल में जिंदा दफनाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि चित्रकूट में तेंदुए के साथ बर्बरता सामने आ गई।
चित्रकूट में इस घटना से पहले दो साल के भीतर यूपी और एमपी क्षेत्र के वन क्षेत्र में बाघ, शेरनी, तेंदुआ, भालू, बंदर, जंगली सुअर व नीलगायों को करंट लगाकर मारा जा चुका है। स्थानीय लोग बताते हैं जिन शवों को शिकारी उठाकर ले नहीं जा पाते, उनकी जानकारी सामने आ जाती है। बीते दो साल में दर्जनों संरक्षित जानवरों का शिकार हो चुका है। जेल से छूटकर आए एक पेशेवर शिकारी ने बताया संरक्षित जानवरों के अंगों की देश और विदेश दोनों जगह मांग है। यूपी और एमपी में इनकी बड़े पैमाने पर तस्करी होती है।
इन पर है देखरेख की जिम्मेदारी
संरक्षित पशु पक्षियों की सुरक्षा व उनकी देखभाल के लिए जिला मुख्यालय और मानिकपुर कस्बे में वन्य जीव प्रतिपालक का कार्यालय बना हुआ है। इस पर मानिकपुर क्षेत्र के रानीपुर वन्य विहार क्षेत्र तक सुरक्षा का जिम्मा है। इसके साथ ही यूपी और एमपी क्षेत्र मेें विशेष रेस्क्यू टीम भी बनाई गई है। इस टीम को जंगलों में निरीक्षण कर जानवरों पर नजर रखनी होती है। वन्य जीव प्रतिपालक के अलावा वन विभाग की तरफ से भी कई स्थानों पर चौकियां बनाई गई हैं, ताकि जानवरों की सुरक्षा की जा सके। घटनाओं पर डालें तो सुरक्षा व्यवस्था कागजों में ही दिखती है।
रेल लाइन से बचाने के भी इंतजाम नहीं
संरक्षित जानवरों की सुरक्षा के उपायों की पोल इससे भी खुलती है कि जंगल क्षेत्र से गुजरी रेल लाइन के आसपास सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। तमाम वन्य जीवों की ट्रेन की चपेट में भी मौत हो चुकी है।
ये है जंगल का स्वरूप
रानीपुर वन्य जीव बिहार लगभग 2600 हेक्टयर वर्ग क्षेत्र में बना हुआ है। ठीक इससे सटा हुआ मप्र क्षेत्र लगा हुआ है, जहां विशाल जंगल कई किमी दूर तक है। पन्ना टाइगर रिजर्व और मुकुंदपुर जू भी इस जंगल से लगा है। मानिकपुर क्षेत्र के जंगलों में शेर, चीता, लकड़बग्घा, सियार व हिरन आदि जानवर हैं।
वन्यजीवों की सुरक्षा व जंगलों में गश्त का काम निरंतर होता है। इसके लिए अलग-अलग वन क्षेत्र में टीमें भी बनी हैं। विभागीय कार्रवाई में तीन साल के अंदर छह मामलों में दस आरोपियों को पकड़ा गया है।
-कैलाश प्रकाश, डीएफओ