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सस्ते दाम पर धान बेचने को मजबूर

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चित्रकूट। धान केंद्रों में किसान समस्याओं से जूझ रहा है। सात से आठ दिन तक किसानों को धान बेचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। किसानों को ट्रैक्टर का किराया सहित रहने खाने तक के लिए खर्च करना पड़ता है। जिससे मजबूरी में किसान कम दाम में गल्लामंडी में आढ़तियों को धान बेचने के लिए मजबूर हैं।
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जिले में कई धान केंद्र बनाए गए हैं। ताकि किसान धान अपने-अपने क्षेत्रों में बेच सके। अगरहुणा गांव के किसान विष्णु व बरवारा गांव के वासुदेव व हरदौली गांव के विकास सिंह, कंठीपुर के किसान धीरेंद्र गौतम ने बताया कि शहर के गल्लामंडी में धान बेचने के लिए आए हैं। पांच दिनों से अधिक का समय हो गया है। इसके बाद भी धान की खरीद नहीं है। जिससे किसानों को भीषण ठंड में रुकना पड़ता है। बताया कि ट्रैक्टर का किराया सहित रुकने खाने के लिए रोजाना धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। जिससे एक-एक किसान को सात से दस हजार रुपये तक खर्च हो जाता है। जिससे मजबूरी में कम दामों में किसान गल्लामंडी में धान बेचने के लिए मजबूर हैं।
जिला में अभी तक कुल 11039.898 एमटी धान की खरीद हुई है। जिसमें कुल 1995 किसानों ने धान बेचा है। 1459 किसानों को धनराशि 4379.16 लाख का भुगतान किया गया है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि समय से पहले किसान केंद्रों में पहुंच जाते हैं। जबकि नंबर के हिसाब से धान खरीदी जा रही है। सभी किसानों का धान खरीदा जाएगा।
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