चित्रकूट। पर्यटन विभाग पर करोड़ों की धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगा है। पुराने संग्रहालय भवन को अस्थाई कार्यालय बनाने के नाम पर 1.64 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि भवन में केवल मरम्मत, रंगाई-पुताई, टाइल्स और गेट का ही काम कराया गया। नए निर्माण का दावा सिर्फ कागजों तक सीमित रहा।
वर्ष 2022-23 में पर्यटन विभाग ने नए अस्थाई कार्यालय के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन निर्माण की जगह पहले से चल रहे संग्रहालय भवन को ही दुरुस्त कर कागजों में इसे नया कार्यालय दिखा दिया गया। असलियत में यह पूरा काम महज मरम्मत तक सीमित रहा।
भवन की मौजूदा हालत खुद सवाल खड़े करती है। परिसर में वाटर फाल अधूरा पड़ा है, हैंडपंप खराब है, कई कमरों की दीवारों में दरारें हैं और पूरे कैंपस में खरपतवार उगी है। वहीं बोर्ड और अन्य सामग्री कबाड़ की तरह पड़ी हुई है।
विभागीय एक अधिकारी का आरोप है कि इस भारी-भरकम खर्च में भवन में एक ईंट तक नहीं लगाई गई। मरम्मत के नाम पर ही करोड़ों रुपये का भुगतान होना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है, उन्होंने यह भी कहा कि बड़े अधिकारियों के दबाव के कारण ऐसे मामलों पर खुलकर बोलना संभव नहीं होता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में नया कार्यालय बनता तो जिले को लाभ होता,
लेकिन पुराने भवन की रंगाई-पुताई पर ही करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। अब जनता सवाल कर रही है कि आखिर पर्यटन विभाग ने इतनी बड़ी धनराशि किस आधार पर पारित कर दी और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
वर्जन-
क्या कहते अधिकारी
निर्माण किस प्रकार हुआ है, इसके बारे में जानकारी नहीं है। यह अभिलेख देखने के बाद ही पता चलेगा कि निर्माण कैसे होना था। पूरा अभिलेख देखने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।
आरके रावत जिला पर्यटन अधिकारी