चित्रकूट। शासन से 50 छात्र संख्या वाले स्कूलों के विलय के लिए अब एक किमी दूरी निर्धारित की गई है। इससे जनपद के करीब 40 स्कूल विलय होने के बाद वापस मूल स्कूल में वापस आ जाएगें जबकि पहले 61 स्कूलों को विलय किया गया था। जनपद में 1262 परिषदीय स्कूल हैं।
शासन के निर्देश पर बीएसए बीके शर्मा ने पहले 25 छात्र संख्या वाले 50 व फिर 30 छात्र संख्या वाले 11 स्कूलों को विलय किया था। सात स्कूलों की दूरी दो किमी से अधिक होने की वजह से विलय को समाप्त कर बच्चों को मूल स्कूलों में वापस करने का आदेश भी जारी किया जा चुका था लेकिन अब शासन ने फिर से नया नियम लागू कर दिया कि अब जिन स्कूलों की दूरी एक किमी से अधिक होगी उनको विलय नहीं किया जाएगा।
इस नियम के तहत 40 स्कूल सूची में आ रहे हैं। वहीं स्कूलों के विलय पर रोक लगाने के लिए बच्चों के अभिभावक व राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने खूब विरोध प्रदर्शन किया, विधायकों ने शासन को पत्र भी लिखा लेकिन स्कूलों के विलय का आदेश वापस नहीं लिया गया। बीएसए ने बताया कि शासन के निर्देश के बाद एक किमी दूरी वाले स्कूलों की सूची बनाई गई है। इसमें 40 स्कूल आ रहे हैं। सदर विकास खंड के 19, मऊ व मानिकपुर के छह-छह, रामनगर के पांच व पहाड़ी के चार स्कूल अब विलय नहीं होगें।
खबर का असर
चित्रकूट। परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर अमर उजाला ने 27 जुलाई के अंक में 193 विद्यालयों के भवन हैं जर्जर नामक शीर्षक के साथ प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। मामले को संज्ञान में लेकर स्कूल शिक्षा राज्य परियोजना निदेशक ने बीएसए ने जवाब मांगा था। जिस पर बीएसए बीके शर्मा ने जवाब दिया कि जनपद में कर्वी विकास खंड के 66, मानिकपुर के 65, पहाड़ी के 23, रामनगर के 21 व नगर क्षेत्र के पांच स्कूल जर्जर की सूची बनाई गई थी। इसमें से 161 स्कूलों का ध्वस्तीकरण करा दिया गया है। 32 स्कूलों को गिराया जाना बाकी है लेकिन इन स्कूलों में शिक्षण कार्य नहीं चल रहा है। बताया कि सभी बीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि जर्जर भवन, खुले मैदान, पेड़ों के नीचे किसी भी बच्चे को बैठाकर कक्षाएं संचालित न की जाए। कोई भी घटना होने पर प्रधानाध्यापक के साथ बीईओ भी जिम्मेदार होंगे। सभी कार्रवाई की जाएगी।