फोटो- 4- जिले की सीमा पर स्थित इटवां मारकुंडी के पास पिंडरा मप्र के चौराहे पर लगा शहीदों के नाम का एत
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चित्रकूट। देश की आजादी के लिए 1857 मेें मेरठ शहर में हुई क्रांति का असर चित्रकूट जिले के मप्र सीमा अंतर्गत पिंडरा गांव में भी पड़ा था। जिसमें अंग्रेजों के खिलाफ ग्रामीणों ने विद्रोह किया था। इसमें 109 ग्रामीण शहीद हो गये थे। इस बात का जिक्र ब्रिटिश लेखक पेर्टिकएंगिल ने एक अक्तूबर 1857 में न्यूयार्क टाइम्स अखबार लेख में किया था। जिसमेें यह भी लिखा था विद्रोह के समय सभी ग्रामीणों के घरों को जला दिया गया था। आज भी पिंडरा गांव के पास चित्रकूट सतना जाने वाली प्रमुख सड़क के चौराहे में स्तंभ लगा है। सिमें घटना के जिक्र के साथ ही उसमें शहीदों के नाम अंकित हैं।
चित्रकूट जिले के मानिकपुर तहसील अंतर्गत मारकुंडी जंगल की सीमा से लगे कुछ ही किमी की दूरी पर मप्र क्षेत्र में पिंड़रा गांव (जिला सतना) है। जब मेरठ शहर में 1857 में मंगल पांडेय ने देश की आजादी के लिए विद्रोह किया था। तो उसके बाद इसका असर चित्रकूट की सीमा से सटे गांवों में भी हुआ था। पिंडरा के भरत कुंवर अमर बहादुर सिंह व ठा. रणपत के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ ग्रामीणों ने विद्रोह कि या गया। इसमें पिंडरा गांव के 109 ग्रामीण शहीद हो गए थे। इस बात का जिक्र ब्रिटिश के लेखक पेर्र्टिक एंगिल ने न्यूयार्क टाइम्स अखबार में 1858 में जिक्र किया था। आज भी पिंडरा गांव के पास स्तंभ चित्रकूट सतना जाने वाली प्रमुख सड़क में बने चौराहे में लगा हैं। इस स्तंभ शहीद हुए ग्रामीणों के नाम भी अंकित हैं।
ये हुए थे शहीद
चित्रकूट। शहीद होने वाले पिंडरा गांव के भारत कुंवर बहादुर सिंह, डा. रणपत सिंह, बाबू राम बहेलिया, धाकर बहेलिया, पं अयोध्या प्रसाद, हनुमान प्रसाद भूमिहार, सरजू बहेलिया, पूरन बहेलिया, विरजू बहेलिया, शंकर सोनी, नारायण, विशाल बहेलिया, हनुमान प्रसाद, बुद्धि काक्षी, कुंज बाबू, रंजीत पिंडारी आदि प्रमुख थे।