श्रीराम लक्ष्मीनारायण मारवाड़ी अस्पताल में जन्मे अद्भुत नामक बालक ने महज 30 घंटे में अपनी आयु पूरी कर ली। इतनी बड़ी विपत्ति के बावजूद उसके पिता ने धैर्य नहीं छोड़ा और सोमवार को नेत्रदान कराकर नई मिसाल कायम की।
दुनिया में न रहते हुए भी उनके बालक की आंखों से दो बच्चों की जिंदगी रोशन हो सकेगी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईबैंक के चिकित्सकों का दावा है कि इतनी कम उम्र में दुनिया में किसी ने नेत्रदान नहीं किया है।
शिवपुर के रहने वाले आशीष कुमार की पत्नी अनुराधा ने शनिवार को मारवाड़ी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया।
परिवार वालों ने प्यार से इस नवजात शिशु का नाम अद्भुत रखा था। सोमवार की सुबह 4:45 बजे इस परिवार पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा जब अद्भुत की मौत हो गई। परिवार में रोना-पीटना मच गया।
आशीष ने ऐसी हालत में भी धैर्य नहीं छोड़ा और बच्चे को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भवन पहुंचे। वहां आईबैंक के संयोजक डा. अनुराग टंडन की देखरेख में डा. शेखर और संदीप ने कार्निया (काली पुतली) निकाल कर नेत्रदान कराया। आशीष मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के शिक्षण कार्य करते हैं।
डा. टंडन ने बताया कि शिशुओं की कार्निया का व्यास 10-11 एमएम होता है, जबकि बड़ों की कार्निया 13-14 एमएम व्यास की होती है। ऐसे में शिशु से प्राप्त दोनों कार्निया का प्रत्यारोपण एक साल की उम्र तक के बच्चे में किया सकता है। दोनों कार्निया को आईएमएस बीएचयू के नेत्ररोग विभाग को सौंप दिया जाएगा, ताकि 96 घंटे के भीतर प्रतीक्षारत नेत्रपीड़ितों में उन्हें प्रत्यारोपित किया जा सके।
किसी के निधन के बाद छह घंटे के भीतर कार्निया मीडिया में डालने केबाद उसे 96 घंटे तक संरक्षित किया जा सकता है। बीएचयू के नेत्ररोग विभाग के डा. अभिषेक चंद्रा ने बताया कि महज 30 घंटे के बच्चे के नेत्रदान से विश्व कीर्तिमान स्थापित हुआ है। इससे पहले मुंबई में सितंबर 2011 में धीमान शाह के 32 घंटे के बच्चे का नेत्रदान कराया गया था। आईएमए के अध्यक्ष डा. पीके तिवारी, सचिव डा. अशोक कुमार राय ने परिजनों के प्रयास की सराहना की है।