पीडीडीयू नगर। चंदौली में पिछले पांच दिनों से लगातार बढ़ रहा गंगा का जलस्तर मंगलवार दोपहर 11 बजे 72.23 मीटर पर पहुंचकर थम गया। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शाम 6 बजे तक जलस्तर स्थिर रहा। इसके बाद भी मंगलवार को पड़ाव क्षेत्र के 6 से ज्यादा गांव में 400 के मकानों में पानी घुस गया। जिले के प्रभारी मंत्री संजीव गोंड ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और प्रभावितों को राहत सामाग्री बांटी।
चहनिया में गंगा के किनारे के गांवों में पानी घुसने के कारण ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। 1000 एकड़ धान और सब्जी की फसल डूब गई है। गंगा के तटवर्ती गांव भुपौली, डेरवा, महड़ौरा, कांवर, पकड़ी, महुअरिया, विशुपुर, महुआरी खास, सराय, बलुआ, डेरवाकला, महुअर कला, हरधन जुड़ा, गंगापुर, पुराबिजयी, पुरागणेन, चकरा, हरधनजुड़ा, सोनबरसा, टांडाकला, महमदपुर, सरौली, तीरगावा, हसनपुर, बड़गांवा, नादी निधौरा, सहेपुर आदि के खेतों में बोई फसलें और सब्जियां डूब कर बर्बाद हो गईं। पशुओं के लिए लगाया हरा चारा पानी में समा गया है। दो दर्जन से अधिक गांव चौतरफा पानी से घिरे हैं। वहां के ग्रामीण, बच्चे और महिलाओं को आवागमन करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ से निपटने के लिए गलवार सुबह 10 बजे पीएसी के 30 जवान नाव के साथ पहुंचे। यह खाद्यान्न वितरण समेत राहत कार्य में सहयोग करेंगे।
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गद्दोचक, दीया और प्रसहटा बाढ़ से घिरा, गांव से नहीं निकल पा रहे लोग
धानापुर। गद्दोचक, रामपुर दीया और प्रसहटा गांव बाढ़ के कारण चारों तरफ से घिर गया है। लोग मंगलवार को गांव से नहीं निकल गए। सुरक्षा के मद्देनजर पीएसी की नाव लगा दी गई है। सड़क पर कमर से ऊपर तक पानी आ गया है। गांव के कुछ लोग बाढ़ चौकियों पर जानवरों के साथ शरण लिए हुए हैं। लेकिन ज्यादातर लोग गांव में हैं जो अपनी जरूरत के सामान लेने के लिए उन्हें बाहर निकलना पड़ रहा है। प्रभारी निरीक्षक शरद गुप्ता ने बताया कि तीनों गांव में सुरक्षा की दृष्टि से पीएसी की नाव लगा दी गई है।
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गांव में दिखा सांप का झुंड
धानापुर। मंगलवार को दीया गांव के धान के खेत में आधा दर्जन सांप देखे गए, यह झुंड में थे। इन्हें देखकर बाढ़ पीडि़त दहशत में हैं। प्रशासन ने उन्हें सावधान रहने को हिदायत दी। गंगा में बाढ़ आने के कारण रामपुर दीया, प्रसहटा, और गद्दोचक सहित तटवर्ती गांव के सिवानों में पानी भर गया है। जंगल झाड़ियों और खेतों में छिपे विषैली जीव-जंतु ऊंचे स्थानों पर पहुंच रहे हैं।
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