चहनिया। करोड़ों खर्च कर बनाए गए अमृत सरोवरों की बदहाली का नजारा रविवार को चहनिया ब्लॉक के मथेला गांव में देखने को मिला। यहां सूख चुके अमृत सरोवर के किनारे एक नीलगाय की मौत हो गई। ग्रामीणों का दावा है कि भीषण गर्मी नीलगाय प्यास से तड़पकर अचेत हो गई थी, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
गांव विनय पांडेय ने बताया कि शनिवार शाम छह बजे वह गांव के हनुमान मंदिर के पास मौजूद थे। इसी दौरान उनकी नजर अमृत सरोवर के किनारे अचेत पड़ी एक नीलगाय पर गई। तालाब पूरी तरह सूखा पड़ा था। आशंका जताई गई कि नीलगाय पानी पीने के लिए यहां पहुंची होगी, लेकिन पानी न मिलने के कारण उसकी हालत बिगड़ गई।
ग्रामीणों ने तत्काल पशु चिकित्सक को बुलाया और नीलगाय का उपचार शुरू कराया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। रविवार को ग्रामीणों ने नीलगाय के शव को तालाब के किनारे गड्ढा खोदकर दफना दिया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधुसूदन ने बताया कि नीलगाय की मौत का कारण पानी का अभाव है। भीषण गर्मी में जल संकट का वन्यजीवों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है।
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दो महीने से बंद है कैनाल, सूख गया सरोवर
ग्रामीणों का कहना है कि दो साल पहले बनाए गए अमृत सरोवर को बलुआ पंप कैनाल से पानी उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन दो महीनों से कैनाल बंद है। इससे मई में ही तालाब सूख गया था। तालाब में दरारें पड़ गई हैं। ग्रामीणों के अनुसार सरोवर की गहराई भी पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण जल संरक्षण नहीं हो पाता।
पानी की तलाश में गांव पहुंच रहे जंगली जानवर
स्थानीय निवासी संतोष मिश्रा ने बताया कि इस क्षेत्र में नीलगाय, सियार और अन्य जंगली जानवरों के लिए यही प्रमुख जल स्रोत था। अब पानी खत्म होने के कारण रोज शाम को जंगली जानवर पानी की तलाश में गांवों की ओर आ रहे हैं। इससे वन्यजीवों के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि सरोवर बनने के बाद न तो यहां बोरिंग कराई गई और न ही कोई रिचार्जिंग की व्यवस्था की गई। गर्मी बढ़ते ही पानी समाप्त हो जाता है और वन्यजीव संकट में पड़ जाते हैं।