पीडीडीयू नगर। ‘कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए’, ‘हाजीपुर से केलवा के घौद मंगवली’ सहित अन्य लोकगीतों से सरोवर तट गुलजार रहे। लोक आस्था का महापर्व डाला छठ पर बुधवार की शाम गंगा नदी तट, सरोवर तटों पर आस्थावानों का रेला उमड़ा। व्रती महिलाओं और पुरुषों ने अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया और सुख समृद्धि की कामना की।
सुबह से ही अर्घ्य देने की तैयारी शुरू हो गई। घरों में व्रती महिलाओं ने स्नान, ध्यान के बाद अर्घ्य देने के लिए सूप, दउरी तैयार की। इसमें पांच से सात प्रकार के फल, ठेकुआ, चावल से बनी मिठाई, फूल, माला, दीपक, रोरी, सिंदूर, कपूर, अगरबत्ती आदि को सजाया। दोपहर बाद महिलाएं और पुरुष नए वस्त्र पहन कर पूरे परिवार के साथ नंगे पैर सरोवर, नदी तटों की ओर चल पड़े। विभिन्न इलाकों से व्रती बैंडबाजा के साथ सरोवर पर पहुंचे तो कुछ महिला व्रती घाटों पर लेट कर पहुंची। घर के पुरुष सदस्य सिर पर फलों का दउरा लेकर चल रहे थे तो बच्चे किशोर कांधे पर गन्ना रख कर घाटों पर पहुंचे। महिलाएं, किशोरियां हाथों के कलश लेकर गीत गाते हुए घाटों पर पहुंची। नगर के दामोदर दास पोखरा, राम मंदिर, माल गोदाम पोखरा, मानस नगर स्थित मानसरोवर तालाब, सिकटिया, अलीनगर स्थित रामजानकी पोखरा पर अर्घ्य देने के लिए व्रती पहुंचे। घाटों पर पहुंच कर व्रतियों ने फलों की टोकरी, सूप, रखे। इसके बाद घाट पर बेदी बनाकर पूजा अर्चना की और कलश स्थापित किया। सरोवर में गन्ने का मंडप बनाया और धूप, दीप, फूल माला से पूजा अर्चना की। इसके बाद जल में उतरी और कमर भर पानी होने पर खड़े होकर भगवान भाष्कर के अस्त होने का इंतजार किया। जैसे ही सूर्य ने रूप बदल कर लालिमा बिखेरी और अंधकार का असर हुआ, वैैस ही लोगों ने जयकारे के साथ दूध, जल आदि से अर्घ्य दिया। पूूजा समिति के सदस्यों ने भी घूम घूमकर व्रतियो को अर्घ्य
के लिए दूध और जल उपलब्ध कराए। व्रतियों के परिवार वालों के साथ आस पड़ोस के लोगों ने भी अर्घ्य दिलाकर पुण्य लाभ कमाया। वहीं अर्घ्य देने वालों को देखने के लिए लोगों की भीड़ रही।इससे घाटों पर जगह कम पड़ने लगी। हालांकि व्रतियों और परिवारीजनों ने सूझ बूझ का परिचय देते हुए एक दूसरे को स्थान दिया। कई बार विवाद की स्थिति आई लेकिन पूजा समितियों ने समझा बुझाकर मामला संभाला।
पीडीडीयू नगर। छठ पर्व पर बुधवार को मेला सा नजारा रहा। नगर के मालगोदाम, मानसरोवर तालाब, दामोदरदास पोखरे के समीप मेले में चाट पक़ौडी, गोलगप्पे, गुब्बारे, खिलौने की दुकाने सजी रही। यहां बच्चों और युवाओं ने खरीददारी की। अर्घ्य देने के बाद व्रती घरों के युवाओं ने खूब आतिशबाजी की और बम पटाखे छुड़ाए। अर्घ्य देने और पूजन अर्चन के बाद व्रती कलश लेकर गीत गाते हुए घर वापस लौट आए। कुछ महिलाएं घाट पर ही सुबह अर्घ्य देने के लिए रुक गई। बृहस्पतिवार की सुबह उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का परायण किया जाएगा। इसके पूर्व घाटों पर विद्युत झालरों और ट्यूबलाइट की आकर्षक सजावट की गई थी। वहीं लाउडस्पीकरों पर छठ मइया के गीत बजाए जा रहे थे। इससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
दुलहीपुर। नगर पालिका परिषद, पीडीडीयू नगर की ओर से यह दावा किया जा रहा था कि सभी दामोदरदास पोखरे की पूर्ण सफाई करा दी गई है। लेकिन हकीकत में पोखरे के दो छोर की ही सफाई हो पाई थी। महिलाएं जब छठ पूजा के लिए पहुंची तो उनके परिजनों ने घाट पर जमी प्लास्टिक, गंदगी और झाड़ियां हटाई। लोग नगर पालिका को इसके लिए कोसते भी रहे।संवाद