बाढ़ से गंगा का जलस्तर बुधवार को शाम पांच बजे तक 72.56 सेंटीमीटर तक पहुंच गया। चौबीस घंटे में जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। अब तक कुल डेढ़ सौ गांवों की दो लाख आबादी बाढ़ की जद में है। 50 गांव बाढ़ से पूरी तरह घिर चुके हैं तो 100 गांवों में गंगा का पानी प्रवेश कर चुका है।
धानापुर में नौघरा और नरौली गांव का अस्तित्व खतरे में हैं। बाढ़ का पानी वर्ष 2013 के रेकार्ड को पार कर चुका है। राहत के नाम पर प्रशासनिक दावा सब कुछ राहत शिविरों तक पहुंचा दिया गया है लेकिन दो राहत शिविरों पड़ाव क्षेत्र के जलीलपुर और चहनियां क्षेत्र के मड़ईपर को छोड़कर कहीं भी न तो राशन पहुंचा है और न ही केरोसिन तेल।
जनप्रतिनिधि अपने-अपने स्तर पर खाने का पैकेट पीड़ितों तक पहुंचा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। बुधवार को करीब दो सौ बाढ़ पीड़ित बुखार से पीड़ित थे जिन्हें चिकित्सकों ने आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराईं। उन्हें सख्त निर्देश दिया कि हैंडपंपों के पानी का सेवन कतई न करें। टैकरों से उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल का इस्तेमाल करें।
चंदौली जिले में गंगा का जलस्तर शाम चार बजे तक 72.56 मीटर रहा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति दयनीय है। कहने को तो प्रशासन सभी व्यवस्थाओं का दावा कर रहा है लेकिन स्थिति बिल्कुल विपरीत है। कंट्रोल रूम का फोन तो उठ रहा है सरकारी सहायता भेजने का प्रबंध करने की सूचना भी दी जा रही है लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई राहत सामग्री पीड़ितों तक नहीं पहुंची।
सर्वाधिक दयनीय स्थिति कुंडा खुर्द और भिसौड़ी गांव की है जहां बाढ़ प्रभावित लोगों ने सरकारी मदद नहीं मिलने पर बुधवार की सुबह प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सूचना पर नायब तहसीलदार मुगलसराय अनीता सिंह ने शीघ्र ही केरोसिन तेल भेजे जाने का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया लेकिन शाम तक वहां कुछ भी नहीं पहुंचा था।
कुंडा खुर्द के प्रधान पति भइया लाल यादव और भिसौड़ी के प्रधान महेंद्र यादव अपने खर्च पर चार नाव चलवा रहे हैं वहीं आज से लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए दो ट्रैक्टर भी लगाया गया है।। चहनियां क्षेत्र के डेढ़ दर्जन गांव बाढ़ से घिरे हैं। इन गांवो में भी जनप्रतिनिधि राहत पैकेट बटंत्र्वा रहे हैं लेकिन प्रशासन केवल खानापूर्ति करने में जुटा हुआ है।