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ट्रॉमा सेंटर : दस साल से रखे हैं एक करोड़ से मिले वेंटीलेटर, बेड, ऑपरेशन थियेटर के उपकरण, नए के लिए फिर मिले 60 लाख, एक ऑपरेशन नहीं हुआ

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जिला अस्पताल में 10 वर्ष पहले 1.57 करोड़ से ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हुआ। इसके बाद एक करोड़ से ज्यादा खर्च कर वेंटीलेटर बेड, ऑपरेशन थियेटर के उपकरण उपलब्ध कराए गए। लेकिन आज तक इनका प्रयोग नहीं किया गया।
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इस बीच फिर से 60 लाख रुपये में ओटी बेड, ट्राॅमा बेड, ओटी उपकरण, इन्वर्टर सहित अन्य सामान फर्म की ओर से पहुंचाया गया। स्टाफ की कमी से वेंटिलेटर, ओटी सहित अन्य चिकित्सकीय सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। करीब ढाई करोड़ से ज्यादा खर्च होने के बावजूद मरीजों की सिर्फ मरहम-पट्टी होती है। इलाज के लिए वाराणसी या मऊ जाना पड़ता है।
ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद जनपदवासियों को लगा कि सड़क दुर्घटनाओं व गंभीर मरीजों काे बेहतर इलाज मिल सकेगा। लेकिन ट्राॅमा सेंटर में करोड़ों रुपये के वेंटिलेटर व ओटी के आधुनिक उपकरण रखे-रखे खराब हो रहे हैं। कई उपकरणों को चलाने वाले कर्मचारियों की कमी है। ट्राॅमा सेंटर में चिकित्सकों को छोड़कर 41 पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत है, उसके सापेक्ष सिर्फ छह स्टाफ हैं।
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ट्राॅमा सेंटर सिर्फ नाम का है, सड़क दुर्घटना या अन्य गंभीर मरीजों को सिर्फ इमरजेंसी जैसी ही सुविधा मिल रही है। सड़क दुर्घटना या अन्य घायल मरीजों के आने पर माइनर ऑपरेशन करने की जगह मरहम पट्टी कर बीएचयू रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल परिसर में सक्रिय दलाल तीमारदारों को बरगला कर मऊ निजी अस्पताल पहुंचाकर कमीशन लेते हैं। ट्राॅमा सेंटर में तीन सर्जन, आर्थो सर्जन, एक एनेस्थीसिया की तैनाती है। पैरामेडिकल स्टाफ 13 की तैनाती हुई थी, अस्पताल प्रशासन द्वारा सात स्टाफ को दूसरी जगह तैनात कर दिया गया।
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पांच वेटिलेंटर, 10 साल में एक भी मरीज नहीं हुआ भर्ती
ट्रॉमा सेंटर में करोड़ों रुपये के उपकरण व पांच वेंटिलेटर पड़े हुए हैं। जो इलाज जिला अस्पताल की इमरजेंसी में होता है, वहीं ट्राॅमा सेंटर में भी होता है। पिछले चार महीने से वेंटिलेटर संचालन का दावा अस्पताल प्रशासन करता है। लेकिन आज तक तक एक भी मरीज को वेंटिलेटर पर भर्ती कर इलाज नहीं हुआ।



रोज 10 से 15 मरीज होते हैं रेफर : आईसीयू के अभाव में रोजाना करीब 10 से 15 मरीज बीएचयू या मऊ रेफर होते हैं। ट्रॉमा सेंटर के नाम पर मिले चिकित्सक अस्पताल की ओपीडी में मरीजों का इलाज करते हैं। जिला अस्पताल में आईसीयू के संचालन के लिए चिकित्सक, नर्स सहित 10 कर्मचारी आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज से ट्रेनिंग लेकर आए। ट्राॅमा सेंटर के प्रथम तल पर कोराना काल में बने पांच बेड के आईसीयू वार्ड के संचालन की जिम्मेदारी इनको दी गई। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इन नर्सों में चार की ड्यूटी हड्डी, सर्जिकल, मेडिकल सहित अन्य वार्डों में लगा दी। आईसीयू का संचालन सिर्फ कागज पर होने लगा। तीन शिफ्ट में आईसीयू संचालन के लिए मानक के अनुसार अतिरिक्त दो एनेस्थीसिया, पांच स्टाफ नर्स, चार स्वीपर सहित अन्य कर्मचारियों की जरूरत है। तीन सर्जन व दो हड्डी रोग चिकित्सक की तैनाती होने के बावजूद माइनर ऑपरेशन तक नहीं होता है।
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ट्रॉमा सेंटर के शासन द्वारा उपकरण उपलब्ध कराया गया है। उक्त उपकरण को ऑपरेशन थियेटर, वार्ड, इमरजेंसी में लगाया जाएगा। कर्मचारियों की मांग शासन से की गई है। - डॉ. एसके यादव, सीएमएस जिला अस्पताल
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