कंदवा। यूपी-बिहार बार्डर पर स्थित कर्मनाशा नदी के समीपवर्ती गांवों के किसान टमाटर की खेती से मालामाल हो रहे हैं। नदी के आसपास के खेतों में लाल-लाल टमाटर देखते बन रहे हैं। मौसम अनुकूल होने से किसानों को इस बार अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। धान के कटोरे में टमाटर की खेती से अच्छी आय देख अन्य किसान भी इसकी खेती के प्रति आकर्षित हुए हैं।
यूपी के बॉर्डर पर स्थित ककरैत गांव के किसान जिले में नदी के किनारे के साथ है नदी के उस पार बिहार में भी तटवर्ती इलाके में बंटाई पर खेत लेकर 10 एकड़ से अधिक भूमि पर टमाटर की खेती कर रहे हैं। मौसम अनुकूल न होने के बाद भी फूल और फल काफी बढ़िया हैं। इसे लेकर किसान भी काफी उत्साहित हैं। खेती करने वाले किसानों का कहना है कि बदली और बारिश नहीं हुई होती तो पैदावार और अच्छी होती और काफी फायदा होता।
दरअसल बाढ़ के बाद नदी के तटवर्ती इलाके की जमीन काफी उपजाऊ हो जाती है। उसकी उर्वरा शक्ति बढ़ने से सब्जी की खेती काफी अच्छी होती है और किसानों को बेहतर पैदावार मिलती है। इससे कम समय में उन्हें अधिक लाभ मिल जाता है। इस साल तटवर्ती इलाके में टमाटर की पैदावार अच्छी होने की वजह से इसे यूपी, बिहार के साथ झारखंड, बंगाल और मध्यप्रदेश तक भेजा जा रहा है। ककरैत गांव के शिवलगन चौधरी, भुल्लन चौधरी, इंद्रजीत चौधरी, अंगद निषाद और श्रवण निषाद ने बताया कि अपने जिले के साथ नदी के उस पार बिहार में भी नदी के किनारे टमाटर की खेती की जा रही है। एक एकड़ खेती पर करीब 23 हजार रुपये खर्च होते हैं। अगर फसल अच्छी निकल गई तो एक एकड़ में 40 से 50 हजार रुपये का फायदा होता है। ककरैत गांव के ही अन्य किसानों ने बताया कि परंपरागत धान और गेहूं की खेती के तुलना में टमाटर की खेती में फायदा अधिक है। इसलिए बंटाई पर टमाटर की खेती की जा रही है। इससे कम समय में काफी फायदा हो रहा है।