पीडीडीयू नगर के रस्तोगी गली में कथा सुनाते पं.अमरनाथ। स्रोत:-जागरूक पाठक
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पीडीडीयू नगर। रस्तोगी गली में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन चित्रकूट से आए कथावाचक पं. अमरनाथ ने सुदामा चरित का प्रसंग सुनाया।
भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता, प्रेम और समर्पण की कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथावाचक ने कहा कि सच्ची वाणी वही है, जिससे भगवान के गुणों का गान हो।
उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद सुदामा संतोषपूर्वक गृहस्थ जीवन व्यतीत करते थे। पत्नी सुशीला के आग्रह पर वह भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका गए। भेंट के लिए सुशीला ने पड़ोस से चार मुट्ठी चावल मांगकर पोटली में बांध दिए।
सुदामा के द्वारका पहुंचने की सूचना मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण नंगे पांव उनसे मिलने दौड़ पड़े और गले लगा लिया। भगवान ने चरण पखारे और गुरुकुल के दिनों की यादें साझा कीं। संकोच में सुदामा चावल की पोटली छिपाने लगे, लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे लेकर चावल खाए। संवाद