पीडीडीयू नगर। स्वस्थ जीवन के लिए खाना खाने के साथ खेलना भी बहुत जरूरी है। आज विश्व में खेलों से ही देश की प्रगति और दम खम का परिचय मिलता है लेकिन जिले में खेल मैदान ही नहीं हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को दम खम दिखाने का मौका ही नहीं मिल रहा है। युवा खिलाड़ियों की माने तो सही संसाधन और खेल मैदान मिले तो जिले के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा सकते हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार खेल संसाधनों को मुहैया कराने पर जोर दे रही है। पाठ्यक्रमों में खेलों को जोड़ा गया है। इसका असर भी ओलंपिक, एशियन गेम, राष्ट्रमंडल खेलों में दिख भी रहा है। दूसरी तरफ जिले में की स्थिति खेलों के मामले में दयनीय है। यहां के कुछ खिलाड़ी राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय स्तर पर चमके हैं तो अपने दम पर। खेलों की दुर्दशा का सबसे बड़ा उदाहरण है कि जिले में खेल मैदान ही नहीं है। रेलवे के खेल मैदान हैं लेकिन वहां आम लोगों को खेलने की इजाजत नहीं है। लांग जंप में गोल्ड मेडल जीत चुके शहाबगंज ब्लाक के उजारीकटवा निवासी मनोज चौहान ने कहा कि जिले स्टेडियम की आवश्यकता है। स्टेडियम के अभाव में खिलाड़ियों को काफी दिक्कत हो रही है।
इसी तरह जिले के मूल निवासी और अब झारखंड क्रिकेट टीम के रणजी खिलाड़ी सौरभ ने कहा कि स्टेडियम और खेल मैदान के अभाव में खिलाड़ियों को खेलों में कैरियर बनाने का मौका नही मिल रहा है। खेल में कैरियर बनाने की इच्छा वाले खिलाड़ियों को दूसरे प्रदेशों की शरण लेनी पड़ रही है। पराहूपुर निवासी गुलशन श्रीवास्तव ने कहा कि जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत है तो उन्हें मैदान और संसाधन उपलब्ध कराने की। अमोघपुर निवासी तीन बार सीनियर किक बाक्सिंग में गोल्ड मेडल विजेता कुमार नंदजी कहते हैं कि जिले के खिलाड़ी लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं से खेल मैदान की मांग कर चुके है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।