चंदौली। धान के कटोरे के रूप में विख्यात कृषि प्रधान जनपद के 94 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि की सेहत बेहद खराब है। गत वित्त वर्ष 22-23 में 2903 से अधिक नमूनों की जांच में मिट्टी में मौजूद कार्बनिक जीवांश की मात्रा मानक से बेहद कम पाई गई है। कार्बनिक जीवांश 0.8 के बजाए 0.5 प्रतिशत, फास्फोरस, पाटोश, जिंक, सल्फर जैसे तत्वों की मात्रा भी अपर्याप्त है।
कृषि प्रधान जिला और धान के कटोरा के नाम से मशहूर जिले की कृषि भूमि की हालत ठीक नहीं। बीते वित्त वर्ष 2023-24 की जांच रिपोर्ट के मुताबिक कार्बनिक जीवांश 0.8 के बजाए 0.5 प्रतिशत है। इसके अलावा फसलों पोषण देने वाले फास्फोरस न्यूनतम, पोटाश मध्यम, सल्फर और जिंक की मात्रा अपर्याप्त है। कमी की भरपाई के लिए किसान खेतों रासायनिक खाद और कीनाशकों का खूब प्रयोग कर फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में दो लाख 35 हजार 807 से अधिक किसान दो लाख 53 हजार 374 हेक्टेयर में खेती करते हैं, जो जिले के 94 प्रतिशत क्षेत्रफल है।
जिले के मिट्टी जांच प्रयोगशाला प्रभारी शुभम कुमार मौर्य ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में दो हजार 903 नमूने जिले सभी नौ विकास खंडों के दो-दो गांवों से लेकर जांच की गई। जांच रिपोर्ट में पता चला कि कार्बनिक जीवांश 0.8 के बजाए 0.5 प्रतिशत, फास्फोरस की मात्रा 40 किलो प्रति हेक्टेयर के बजाए 13.5 किलाे प्रति हेक्टेयर, पोटाश की मात्रा 250 से ऊपर होने की बजाय 100 से 250 के बीच है। वहीं, सल्फर 10 से 15 पीपीएम से ऊपर होने की बजाय 10 से कम मिली। जिंक की मात्रा 0.6 पीपीएम ही पाया गया जो 1.2 पीपीएम होना चाहिए।
जिले में दो साल से 4981 किसान कर रहे जैविक खेती
कृषि विभाग की ओर से जिले में नमामि गंगे योजना के तहत 133 कलस्टर में 4981 किसान 2660 हेक्टेयर में जैविक और गौ आधारित प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इसमें सहयोगी के तौर पर दो एजेंसियां काम कर रही है।
वर्जन
जिले ही नहीं पूरे देश में मिट्टी में कार्बनिक जीवांश की कमी है। जिसके सुधार के लिए अलग योजनाओं के तहत किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। - मनोज कुमार, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रभार उप कृषि निदेशक