जिला सहकारिता विभाग की ओर से एक से 30 सितंबर तक किसानों के लिए सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत किसानों की 11 अंकों की आईडी बनाई जाएगी। आईडी के बाद खतौनी और आधार कार्ड से किसानों के स्मार्ट कार्ड बनाए जाएंगे। आधार कार्ड से पॉश मशीन के जरिए किसानों को खाद बांटा जाएगा। एआर का कहना है कि शासन की ओर से खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
इस वर्ष प्रदेश में खाद को लेकर किसानों के बीच मारामारी देखने को मिली। इसकी एक प्रमुख वजह कुछ किसानों के खेत के सापेक्ष ज्यादा मात्रा में समितियों से खाद उठाने को भी बताया गया है। इसकी रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार की ओर से किसानों की आईडी व उनके स्मार्ट कार्ड बनाने की प्रक्रिया आरंभ की गई है। योजना के तहत जिले में एक सितंबर से 30 सितंबर तक सदस्यता अभियान चलाकर किसानों के क्रेडिट कार्ड बनाए जाएंगे। आगामी रबी की फसल से स्मार्ट कार्ड के आधार पर ही किसानों में खाद का वितरण किया जाएगा। 11 अंकों के बनने वाले आईडी व स्मार्ट कार्ड के लिए किसानों की खतौनी व उनके आधार कार्ड का उपयोग किया जाएगा। इसमें दर्ज होगा कि कितने खेत के आधार पर किसान को कितना खाद दिया जाएगा। जो किसान योजना के तहत अभियान के दौरान सदस्य बनेंगे, उन्हें पॉश मशीन के जरिए खाद दिया जाएगा।
बन चुकी है समितियों की आईडी
योजना के तहत जिले में सभी 104 समितियों की आईडी पहले ही बन चुकी है। इसमें 83 पुरानी और 21 नई समितियां शामिल हैं। समितियों पर ही किसानों की आईडी बनेगी व उनके स्मार्ट कार्ड बनाए जाएंगे। स्मार्ट कार्ड बनने के बाद पॉश मशीन के जरिए खाद का वितरण किया जाएगा।
जिले में एक सितंबर से किसानों के लिए सदस्यता महा अभियान चलाया जाएगा। विभाग की ओर से किसानों से अभियान में हिस्सा लेकर योजना का लाभ उठाने की अपील की गई है। जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। प्रत्येक समिति पर चार से पांच सौ बोरी यूरिया उपलब्ध है।
- श्रीप्रकाश उपाध्याय, सहायक निबंधक, (एआर), चंदौली।