पीडीडीयू नगर। हरि प्रबोधनी देवोत्थान एकादशी का पर्व जिले में सोमवार को परंपरागत तरीके से हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। भक्तों ने सुबह गंगा स्नान किया और शाम के वक्त घर के आंगन में तुलसी और भगवान विष्णु का विवाह कराया। बाद में देवताओं को नए गुड़,कंद आदि फल अर्पित किए और भगवान की भव्य आरती उतारी। एकादशी के साथ ही चतुर्मास व्रत का समापन हुआ और रुके हुए मांगलिक कार्यों की शुरूआत हुई। पर्व को लेकर बाजार में भी उत्साह का माहौल रहा।
मान्यता है कि चतुर्मास के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को सृष्टि के पालनहारी भगवान विष्णु योगमाया से जागते हैं। इसके बाद शादी विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरूआत होती है। सबसे पहला विवाह भगवान विष्णु और तुलसी का होता है। इसी वजह से इस दिन का अत्यधिक महत्व है। वैसे तो तुलसी विवाह की तैयारियां पूर्व से ही शुरू हो गई थी। रविवार को ही बाजार पूरी तरह सज गए लेकिन सोमवार को चहल पहल बढ़ गई। घरों में भक्तों ने सुबह व्रत का संकल्प लिया और स्नान ध्यान किया। नगर सहित आस पास के लोग जिले के पड़ाव, रौना, कैली, भूपौली आदि गंगा घाटों पर पहुंच कर स्नान ध्यान किया। वहीं बड़ी संख्या में स्नानार्थी गंगा स्नान के लिए वाराणसी गए। वापस घर आकर शाम के वक्त तुलसी के पौधे के समीप गन्ने का मंडप सजाया। इसे कपड़े, विद्युत झालर आदि से सजाया। इसके बाद विधि विधान से भगवान विष्णु स्वरूप शालिग्राम और तुलसी का विवाह कराया। भगवान को नए गुड़, कंद, पानी फल सिंघाड़ा, केला सहित अन्य फल अर्पित किए। तुलसी विवाह के साथ ही चार माह से रुके वैवाहिक कार्यक्रम की शुरूआत हो गई।
चहनियां। क्षेत्र के बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा में हरि प्रबोधनी एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने डूबकी लगाई। इस मौके पर बैगन, मूली आदि खाद्य वस्तुओं को गंगा में प्रवाहित किया। इस दौरान गंगा घाट पर मेला गा रहा। इसके पूर्व भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा की व्यवस्था की गई।