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शिव की सेवा ही परम साधन, शिवपद ही परम साध्य : अखिलानंद महाराज

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पड़ाव के बहादुरपुर में कथा सुनाते अ​खिलानंद। संवाद
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पड़ाव। क्षेत्र के बहादुरपुर गांव स्थित कामाख्या निवास में आयोजित नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन सोमवार को पुराण वक्ता अखिलानंद महाराज ने मानव जीवन के परम साध्य और उसे प्राप्त करने के साधनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के चरणों की प्राप्ति ही परम साध्य है और उनकी सेवा ही परम साधन है।
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उन्होंने बताया कि भक्ति के प्रमुख साधनों में शिव कथा का श्रवण, वाणी से उनका कीर्तन और मन से उनका स्मरण शामिल है। इन तीनों को श्रेष्ठ साधन बताया गया है। भगवान शिव के गुण, स्वरूप, लीलाओं और नाम का जप, वैदिक मंत्रों का पाठ तथा स्तुति करना ही कीर्तन है। सत्संग के माध्यम से शिव चरित्र का श्रवण करने से श्रद्धा और भक्ति उत्पन्न होती है, जो भगवान शिव की कृपा से ही संभव है।
इस अवसर पर यजमान कांति जायसवाल, शेखर जायसवाल, निधि जायसवाल, ओम प्रकाश जायसवाल, कमलेश तिवारी, अजय राठौड़, अनिल गुप्ता (गुड्डू), बबीता जायसवाल, अंजलि राठौड़, विशाल तिवारी, प्रमोद तिवारी, शिवशंकर पटेल, सौरभ गुप्ता, आलोक पांडेय, संतोष पाठक, नरेंद्र मिश्र, श्रेयस शिव, वीरेंद्र, नीतेश श्रीवास्तव, संदीप आदि मौजूद रहे।
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