पीडीडीयू नगर। जिले में हर वर्ष निजी चिकित्सालय व जांच केंद्रों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है, इसके चलते यहां से निकलने वाला बॉयो मेडिकल वेस्ट भी काफी बढ़ गया है। वेस्ट के निस्तारण को लेकर लापरवाह निजी अस्पताल व जांच केंद्र इसे सड़क पर खुले में ही फेंक दे रहे हैं। जबकि इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अपनी आंखें मूंद रखी है।
जिले में 645 सरकारी, निजी अस्पताल, जांच घर हैं। यहां से प्रतिदिन तकरीबन पांच टन बॉयो मेडिकल वेस्ट निकलता है। जिसमें इस्तेमाल हुई सुई, गंदी रूई, पट्टी, इस्तेमाल हो चुकी दवाइयों के पैकेट आदि शामिल हैं। सरकारी अस्पतालों से निकलने वाले बॉयो मेेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए ठेके पर व्यवस्था की गई है लेकिन प्राईवेट अस्पताल कुछ नहीं कर रहे हैं। निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों से निकलने वाले बॉयो मेडिकल वेस्ट को सड़क किनारे फेंक दिया जाता है। हालांकि कुछ अस्पतालों में बॉयो मेडिकल वेस्ट डालने के लिए अलग- अलग कूड़ेदान रखे हुए हैं लेकिन लापरवाह अस्पताल प्रबंधन इसके निवारण की उचित व्यवस्था करने के बजाय सड़क पर ही फेंक दे रहे हैं।
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जिले में संचालित हैं सरकारी-निजी अस्पताल एवं जांच घर
पीडीडीयू नगर। जिलेभर में दो जिला चिकित्सालय हैं। जिसमें एक चंदौली में व दूसरा चकिया में स्थित है। वहीं चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 23 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 30 आयुर्वेदिक अस्पताल, 20 होमियोपैथिक अस्पताल, 248 उप स्वास्थ्य केंद्र दो अर्बन हेल्थ सेंटर समेत 275 प्राइवेट अस्पताल व 88 जांच केंद्र हैं।
बायो मेडिकल वेस्ट से कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैलती है। इसमें एचआईवी पीड़ित मरीज की सुई या अन्य बीमारी में इस्तेमाल हुई सुई किसी व्यक्ति को चुभ गई तो वह गंभीर बीमारी से पीड़ित हो सकता है। इसके अलावा टीबी, श्वांस, दमा, पेट, फेफड़ा से संबंधित बीमारी फैल सकती है।
सरकारी अस्पतालों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण की व्यवस्था की गई है, वहीं गैर सरकारी अस्पतालों में भी इसकी व्यवस्था करने के लिए निर्देश दिया गया। जहां यह व्यवस्था नहीं होगी उन अस्पतालों व जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डॉ. युुगल किशोर राय, सीएमओ, चंदौली