पीडीडीयू नगर। धान की खेती में यूरिया का अहम योगदान होता है। पौधों को आगे बढ़ने और उनकी मजबूती के लिए रोपाई के कुछ दिन बाद ही इसका छिड़काव कराया जाता है। इसके बाद बीच-बीच में जरूरत के अनुसार छिड़काव किया जाता है। इसलिए हर वर्ष यूरिया की मांग अधिक होती है। इस वर्ष रोपाई अभी पूर्ण नहीं हुई है कि खाद की कमी होने लगी है। जिले के पीसीएफ बफर में महज सौ एमटी ही यूरिया बची है। इतनी ही डीएपी भी बची है। साधन सहकारी समितियों पर 1841 एमटी का प्रेषण कर दिया गया है। हालांकि अभी कहीं से खाद की किल्लत का मामला नहीं आया है। बीते वर्षों की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने दो रैक यानी करीब पांच हजार एमटी यूरिया की मांग सहकारिता विभाग के आयुक्त से की है।
करीब एक लाख 88 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में होने वाली खरीफ की खेती के लिए जिले में 7305 एमटी यूरिया का लक्ष्य है। इसी तरह डीएपी का लक्ष्य 4509 एमटी व एनपीके का लक्ष्य 212 एमटी निर्धारित है। सहकारिता विभाग के अनुसार इसमें से पीसीएफ केंद्रों पर बिक्री के लिए 1841 एमटी यूरिया प्रेषित कर दी गई है। वहीं डीएपी 2572 एमटी भेजी जा चुकी है। एनपीके भी 468 एमटी प्रेषित की जा चुकी है। वहीं पीसीएफ के बफर में 100 एमटी यूरिया और इतनी ही डीएपी शेष है। कृषि विभाग के अनुसार, जिले में करीब 75 फीसदी रोपाई हो चुकी है। अब यूरिया की जरूरत पड़ेगी।
जिले में खाद की कमी को त्वरित रूप से पूर्ण किया जा सके इसके लिए प्रीपोजिशनिंग में खाद रखी जाती है। सहकारिता विभाग के अनुसार जिले के प्रीपोजिशनिंग में कुल 3897 एमटी उर्वरक रखा है। इसमें 1927 एमटी यूरिया, 1268 एमटी डीएपी और 702 एमटी एनपीके का स्टॉक है।
यूरिया का उपयोग फसल की शुरूआती अवस्था में किया जाता है। धान की खेती में रोपाई के एक से दो सप्ताह में किया जाता है। दूसरी बार जब कल्ले बनने लगते हैं यानी रोपाई के करीब 50 दिन के बाद और तीसरी बार बालियां निकलने की अवस्था में छिड़काव कराया जाता है। डीएपी की जरूरत रोपाई के समय ही पड़ती है। जिला कृषि अधिकारी बसंत कुमार दुबे ने कहा कि उर्वरक को लेकर विभाग गंभीर है। निदेशालय स्तर से भी रोज समीक्षा होती है। फिलहाल खाद की जिले में कमी नहीं है।
पीसीएफ करीब 100 एमटी यूरिया और इतनी ही डीएपी अभी शेष है। पीसीएफ द्वारा केंद्रों पर बिक्री के लिए 1841 एमटी यूरिया भेजी गई है। जिलाधिकारी के माध्यम से दो रैक यूरिया की मांग की गई है। उम्मीद है कि दो-चार दिन में उर्वरक मिलेगा। खाद की किल्लत अभी कही नहीं है। क्योंकि यूरिया की ज्यादा जरूरत करीब 20 दिन बाद ही जाएगी।
- विनोद पांडेय, एडीसीओ- सहकारिता