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72 घंटे का दावा हवाहवाई, महीनों बाद भी नहीं मिला धान का धन

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पीडीडीयू नगर। किसानों से धान खरीद के बाद सरकार का दावा था कि 72 घंटे के अंदर उनके खाते में पूरे पैसे चले जाएंगे लेकिन जनपद में स्थिति यह है कि हजारों किसानों के बेचे गए धान के पैसे महीनों बाद भी उनके खाते में नहीं पहुंच पाए हैं। कई किसानों के घर शादी पड़ी है और उन्हें जरूरी कार्य करने हैं। धान बिक्री का पैसा न मिलने से ये किसान कर्ज लेकर आयोजनों को संपन्न करने के लिए विवश हैं।
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धान की खेती करने के लिए कई किसानों ने साहूकारों से कर्ज भी लिया है। अब बिक्री किए गए धान का पैसा न मिलने से साहूकार के कर्ज का ब्याज बढ़ता जा रहा है। वहीं कई किसानों ने पैसे मिलने की आस में बहन-बेटियों की शादी तय कर दी है। पैसा न मिलने के कारण उनके सामने कर्ज लेकर शादी करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। सरकार ने किसानों को उपज की बिक्री के 72 घंटे के अंदर भुगतान का आश्वासन दिया था पर ऐसा हो नहीं पा रहा है। इसे लेकर किसानों में आक्रोश है। ताराजीवनपुर संवाददाता के अनुसार शासन की ओर से किसानों के धान का समर्थन मूल्य 1940 रुपया करने के साथ बेचे गए धान का भुगतान 72 घंटे में किसानों के खाते में भेजने का वादा किया गया था। बावजूद इसके महीनों बीतने के बाद भी किसानों के खाते में पैसे नहीं आ पाए हैं। इससे किसानों के कई जरूरी कार्य ठप हो चुके हैं। वे अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है।कंदवा संवाददाता के अनुसार सरकार के 72 घंटे में धान खरीद का भुगतान करने का दावा क्षेत्र के कई गांवों में हवा हवाई साबित हो रहा है।दो माह बाद भी किसानों के खाते में पैसा नहीं पहुंचा है जिसे लेकर किसान परेशान हैं। असना गांव के अजीत सिंह, प्रदीप सिंह, नागेंद्र सिंह, खोर के शिवमुनि बिंद सहित कम्हरिया, डेढ़गांवा गांव के कई किसानों के खाते में दो माह बाद भीधान बिक्री का पैसा नहीं आया है। धन न आने से किसानों की अगली खेती के साथ कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसे लेकर किसान काफी परेशान हैं।
बसनी गांव निवासी किसान केदार यादव ने बताया कि डेढ़ माह पूर्व अपना धान क्रय केंद्र पर बेचा है लेकिन अभी तक खाते में पैसा नहीं आया है। इससे बहुत से जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वसंतु की मडई गांव निवासी बाढू पहलवान ने बताया कि उन्होंने अपना धान क्रय केंद्र पर लगभग 40 दिन पूर्व बेचा था। उम्मीद थी कि पैसा समय से मिल जाएगा तो लड़की के हाथ पीले करेंगे लेकिन अभी तक शासन द्वारा खाते में पैसा नहीं भेजना मुसीबत बन चुका है। बसंतु की मंडई निवासी जयप्रकाश ने बताया कि एक महीने पूर्व धान बेचने के बाद अभी तक खाते में पैसा आने का इंतजार कर रहे हैं। विडंबना यह है कि जिस उम्मीद से अपनी उपज को बेचा था वह कार्य पैसे के अभाव में प्रभावित हो रहा है। असना निवासी रामअवध सिंह ने बताया कि 56 कुंतल धान बेचा है लेकिन अब तक उसका भुगतान नहीं हुआ है।
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