मौसम में हो रहे परिवर्तन और तापमान में उतार-चढ़ाव से तेंदू पत्ते की खरीद नहीं हो पा रही है। हालत यह है कि तेंदू पत्ता खरीद की निर्धारित समयावधि पूर्ण होने में मात्र आठ दिन शेष रह गए हैं और वन निगम 4800 मानक के सापेक्ष महज 1002 मानक तेंदू पत्ते की खरीद करा पाया है। इससे तेंदू पत्ते की तोड़ाई में जुटे मजदूरों के सामने पेट भरने की समस्या खड़ी हो गई है।
नौगढ़ के जंगली क्षेत्रों में तेंदू पेड़ों की भरमार है। तेंदू पत्ते की तोडा़ई में जुटे परिवारों की आजीविका तेंदू पत्तों की खरीद पर निर्भर है। इसके साथ ही जंगली क्षेत्रों में विचरण करने वाले वनवासी तेंदू पत्तों को बेचकर आजीविका चलाते हैं। वहीं तेंदू पत्ते की उपज वन निगम के राजस्व का सबसे बड़ा जरिया है। हर वर्ष वन निगम अप्रैल के अंतिम सप्ताह से एक जून तक तेंदू पत्तों की खरीद करता है। इस वर्ष तहसील नौगढ़ में वन निगम ने तेंदू पत्तों की खरीद के लिए 4800 मानक लक्ष्य तय किया है। इसके लिए नौगढ में जयमोहनी रेंज और मजगाई को संबद्ध कर 39 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं लेकिन मई का महीना समाप्त होने वाला है और सोमवार तक महज 1002 मानक पत्तों की खरीद हो पाई है। इस संबंध में सेक्शन अधिकारी कैलाश यादव ने बताया कि जी तोड़ मेहनत करने के बाद भी कोरोना महामारी के चलते तेंदूपत्ता तोड़ने में श्रमिक परिवारों ने भी रुचि नहीं दिखाई है। बेमौसम बारिश का दौर अब भी बना हुआ है। वन उपज विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आंधी के साथ तेज बारिश हो गई तो पत्ते की अच्छी उपज की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। तेज गर्म हवाओं के बगैर पत्ती का विकास होना संभव नहीं है।