चकिया। प्रदेश में विधानसभा चुनाव की शुरूआत वर्ष 1952 से हुई थी, लेकिन वर्ष 1952 तथा वर्ष 1957 में चकिया विधानसभा का अलग अस्तित्व नहीं था। चकिया तहसील चन्दौली-चकिया विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी हुई थी। चन्दौली-चकिया विधान सभा क्षेत्र में विधायक की दो सीटों के लिए मतदान होता था। जिसके चलते हर मतदाता दो वोट देता था, इसके लिए पोलिंग बूथ पर भी दो बैलेट बाक्स रखे जाते थे।
चकिया पूर्व ब्लाक प्रमुख बयोवृद्ध नेता बच्चन सिंह बताते है कि चकिया-चन्दौली विधान सभा पर चुनाव वर्ष 1952 से ही आरंभ हुआ था। इस चुनाव में दो विधायक चुने गये थे। जिसमें एक विधायक सामान्य सीट पर तथा दूसरा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुना जाता था। वर्ष 1957 के चुनाव में भी यही स्थिति बनी रही। वर्ष 1962 में चकिया विधानसभा का स्वतंत्र रूप से गठन होने के बाद से ही स्थिति बदली। वर्ष 1952 तथा वर्ष 1957 के विधानसभा चुनाव में हर मतदाता एक वोट सामान्य जाति के विधायक को चुनने के लिए तथा दूसरा वोट अनुसूचित जाति के विधायक को चुनने के लिए देता था। इस तरह हर मतदाता दो वोट देता था। पोलिंग बूथों पर भी सामान्य श्रेणी विधायक के लिए एक बैलेट बाक्स तथा अनुसूचित जाति के विधायक को वोट देने के लिए दूसरा बैलेट बाक्स रखा जाता था। वर्ष 1952 तथा वर्ष 1957 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर सामान्य सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी तथा अनुसूचित जाति की सीट पर रामलखन विधायक निर्वाचित हुए थे।