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चकिया विधानसभा में कोई विधायक नही लगा सका हैट्रिक

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चकिया। सुरक्षित विधानसभा चकिया को अस्तित्व में आए 60 वर्ष हो गए हैं, लेकिन अब तक हुए 15 चुनावों में कोई भी विधायक हैट्रिक नहीं लगा सका है। कांग्रेस नेता खरपत राम तथा भाजपा के राजेश बहेलिया को लगातार दो जीत मिल सकी है, लेकिन हैट्रिक लगाने की कोशिश में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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विधानसभा का गठन वर्ष 1962 में हुआ था। पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर रामलखन ने जीत दर्ज की थी, लेकिन वर्ष 1967 में हुए दूसरे चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के बेचन राम के हाथों उन्हें पराजय झेलनी पड़ी। वर्ष 1969 में हुए मध्यावधि चुनाव में रामलखन ने पुन: कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की, लेकिन वर्ष 1974 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का टिकट बेचन राम को मिला जिन्होंने जीत हासिल की। वर्ष 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर श्यामदेव निर्वाचित हुए। पुन: वर्ष 1980 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खरपत राम विधायक बने। उन्होंने वर्ष 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की, लेकिन वर्ष 1989 में हुए चुनाव में उन्हें कांग्रेस का टिकट ही नहीं मिला। वर्ष 1991 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर किस्मत आजमाया लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे हैट्रिट लगाने में सफल नहीं हो सके।
वर्ष 1989 का चुनाव जनता दल के टिकट पर सत्यप्रकाश सोनकर ने कांग्रेस के रामलखन को हराकर जीता। वर्ष 1991 के चुनाव में भाजपा के राजेश बहेलिया विधायक बने। उन्होंने वर्ष 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की, लेकिन वर्ष 1996 में हुए चुनाव में उन्हे तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में सत्यप्रकाश सोनकर ने बसपा के नंदलाल राम को पराजित किया। राजेश बहेलिया भी हैट्रिक लगाने में सफल नहीं हो सके। वर्ष 2002 में भाजपा के शिवतपस्या पासवान विधायक बने उन्होंने सपा के सत्यप्रकाश सोनकर को पराजित किया। वर्ष 2007 के चुनाव में बसपा के जितेन्द्र कुमार एडवोकेट ने सपा के सत्यप्रकाश सोनकर को पराजित किया। वर्ष 2012 के चुनाव में सत्यप्रकाश सोनकर के निधन के बाद उनकी पत्नी पूनम सोनकर को सपा ने टिकट दिया। वे चुनाव जीतकर विधायक बनीं। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के शारदा प्रसाद ने बसपा के जितेन्द्र कुमार एडवोकेट को पराजित कर दिया।
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