पीडीडीयू नगर । एक तरफ नगर पालिका धन की कमी से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ पालिका क्षेत्र में निजी चिकित्सालयों से लेकर जांच केंद्रों पर मेहरबान हो गई है। नगर में संचालित होने होने अस्पताल , क्लीनिक, नर्सिंग होम और जांच केंद्र पर नगर पालिका का दस सालों से लगभग 44 लाख रुपये लाइसेंस शुल्क बकाया है। जिसे नगर पालिका अब तक नहीं वसूली पाई है।
नगर पालिक की ओर से व्यवसायियों से लाइसेंस शुल्क वसूला जाता है। इसमें नगर क्षेत्र में होने वाले सभी प्रकार के व्यवसाय शामिल हैं। अलग-अलग में आने वाले व्यवसायों के लिए शुल्क की दर भी अलग है। लाइसेंस शुल्क वसूली से नगर पालिका को आय भी होती है। इसके बाद भी नगर क्षेत्र में संचालित होने वाले अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम एवं जांच केंद्र से लाईसेंस शुल्क वसूल पाने में नगर पालिका पूरी तरह से नाकाम है। वर्ष 2019 के आंकड़े के अनुुसार नगर पालिका क्षेत्र में संचालित होने वाले अस्पताल, नर्सिंग होम, जांच केंद्र व क्लीनिक की संख्या 81 है। नगर पालिका का लगभग 44 लाख रुपये इन पर बकाया है। जबकि पालिका की ओर से इन्हें नोटिस भी दिया जा चुका है। मगर अभी तक वसूली नहीं हो पाई है।
पीडीडीयू नगर। नगर पालिका के अधिकारियों ने अस्पताल, नर्सिंग होग, क्लीनिक व जांच केंद्र संचालकों से वसूली का कई बार प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार जब-जब अधिकारी लाइसेंस शुल्क वसूलने का प्रयास करते हैं तब-तब राजनीतिक दबाव के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। राजनीति दबाव का असर नगर पालिका की आय पर पड़ता है। संवाद
लाइसेंस फीस वसूली के लिए नोटिस दिया गया था। अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक और जांच केंद्रों के संचालकों से मीटिंग कर उनसे शुल्क जमा कराने का प्रयास किया जाएगा। - कृष्ण चंद्र, ईओ नगर पालिका, पीडीडीयू नगर