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मुहर्रम: एल्यूमीनियम, कंकड़, गेहूं, बांस, कागज और शीशे के निकले ताजिए, युवाओं ने दिखाया करतब; मना मातम

Wed, 17 Jul 2024 05:53 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली

सार

Chandauli News: मोहर्रम के जुलूस के दौरान पुलिस प्रशासन अलर्ट पर रहा। मुस्लिम इलाकों से लेकर सड़कों तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस की टुकड़ियां तैनात रहीं। वाहनों को डायवर्ट कर दिया जा रहा था। हालांकि, एक दिन पहले ही यातायात के नियमों का एलान कर दिया गया था। दूसरी तरफ, अकीदतमंदों ने परंपरागत तरीके से जुलूस निकाला।
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मोहर्रम का जुलूस निकालते अकीदतमंद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 वीर साथियों की शहादत की याद में दसवीं मोहर्रम पर जुलूस की शक्ल में ताजियों के साथ अकीदतमंदों का हुजूम निकला। यह जुलूस इमाम चौकों से निकला, जहां उन्होंने नवीं मोहर्रम पर ताजियों को स्थापित कर रखा था।

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ताजियों को लेकर वे करबला पहुंचे और वहां उसे दफन करने की रवायत पूरी की। ताजियों के साथ अकीदतमंदों के निकलने का सिलसिला दोपहर एक बजे के करीब शुरू हुआ। तरह-तरह के आकार के भव्य ताजियों के विभिन्न अखाड़ों के लोग करतब दिखाते चल रहे थे।

कुछ युवा तो ऐसे-ऐसे करतब दिखा रहे थे, लोगों को आश्चर्यचकित कर दे रहे थे। जुलूस में बैंडबाजे और शहनाई की मातमी धुन इमाम हुसैन की शहादत की लगातार याद दिला रही थी। कंकड़, गेहूं, अल्युमिनियम, बांस, कागज और शीशे के बने ताजिये लोगों का ध्यान बरबस खींच रहे थे।
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सड़कों पर पैर घूम रहे थे, जो ताजिया देख दौड़कर पहुंच रहे थे और मोर पंख झालकर श्रद्धा व्यक्त कर रहे थे। उधर, इस अवसर पर घर-घर फातिहा पढ़ने का सिलसिला भी जारी था। छोटे ताजिए दिन में निकले, जबकि बड़े ताजियों के निकलने का समय शाम से लेकर रात तक रहा।

सभी ताजिये सतपोखरी, मलोखर, शकूराबाद, मोहम्मदपुर, दुलहीपुर, महाबलपुर, भिसौड़ी, कुंडा कला, हरिशंकरपुर, बगही के साथ ही नई बस्ती के लोग अपने अपने करबला तक पहुंच रहे थे। ताजिया दफन करने के बाद जुलूस वापस अपने-अपने इमाम चौक तक आ रहा था, जहां उसके समाप्ति का एलान हो रहा था। 

सभी जुलूसों का नेतृत्व इमामबाड़ों के मुतवल्ली कर रहे थे। इस दौरान गरीबों में खाना, शर्बत, खिचड़ी भी बांटी गई। इससे पहले अकीदतमंदों ने गुस्ल किया और खुदा की इबादत की। तिलावत-ए-कलाम पाक किया गया और मजलिस लगी। इसमें इमाम हुसैन की कुर्बानी पर प्रकाश डाला गया।

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मोहर्रम का जुलूस निकालते अकीदतमंद। - फोटो : अमर उजाला
ऐलुमिनियम की ताजिया रहीं आकर्षण का केंद्र
दसवीं मोहर्रम का सूरज डूबा तो शामे गरीबां आ गई। कर्बला में हुसैन और उनके साथियों की शहादत के बाद उनके खेमे जला दिए गए। दस मोहर्रम पर बुधवार को जुलूसों का जो सिलसिला शुरू हुआ वह रात भर जारी रहा। इस दौरान लगभग सभी प्रमुख सड़कों पर भीड़ उमड़ी रही।

सड़कें ताजियों के जुलूस से गुलजार रहीं और हर लबों पर या हुसैन की सदाएं रहीं। वहीं, सतपोखरी गांव निवासी नियाज अहमद ने 50 किलों ऐलुमिनियम व 20 किलो स्टील की पाइप से आठ फिट ऊंचाई की ताजिया तीन महीने के समय लगा था बनाने में। यह ताजिया लोगों के विशेष आकर्षण व श्रद्धा का केंद्र रहीं, जो सबसे लंबी और खूबसूरत हैं। हस्तकला की बेहतरीन मिसाल पेश करने वाले ये ताजिए सभी की अकीदत व आकर्षण का केंद्र रहीं।
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