चंदौली। जिले में कई ऐसे भ्रष्टाचार के मामले है जो सरकारी फाइलों तक सिमित है। जांच के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई और रिकवरी की प्रक्रिया लंबित है। अफसर अपनी गर्दन बचाने के लिए स्पष्टीकरण और नोटिस देकर चुप रहते है। ऐसे में सरकारी कार्यों के प्रति अफसरों की निष्ठा और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
बबुरी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कई वर्षो से अधर में लटका है। जांच के दौरान कार्यदायी संस्था के द्वारा मानकों की अनदेखी और गुणवत्ता विहिन निर्माण की पुष्टी हो चुकी है। लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन ने कार्यदायी संस्था को ब्लैक लिस्टेड करने से परहेज किया। वहीं नौगढ़ ब्लाक में आवास निर्माण के दौरान करीब डेढ़ सौ फर्जी मामले सामने आए। इसमें अफसरों की ओर से केवल लाभार्थियों को नोटिस देकर अपने दायित्वों की इतिश्री कर लिया गया। वहीं शौचालय निर्माण के दौरान नौगढ़ में दो पंचायत सचिवों पर भ्रष्टाचार का आरोप है।
लेकिन जिला प्रशासन ऐसे अफसरों पर कार्रवाई के बजाय नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। ऐसे भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ निलंबन या बर्खास्तगी को लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जिले में ऐसे ही दर्जनों भ्रष्टाचार के मामले है, जो सरकारी फाइलों की शोभा बढ़ा रहे है। जबकि इसमें संलिप्त अफसर सीना तानकर नौकरी कर रहे है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं करने के पीछे जिला प्रशासन की मंशा पर भी सवालिया प्रश्न चिह्न लग गया है।
इस संबंध में बात करने पर सीडीओ चंदौली अजितेंद्र नारायण ने बताया कि भ्रष्टाचार के ज्यादातर मामलों की जांच समिति के द्वारा की जा रही है। बबुरी सीएचसी निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी तय की गई है। संस्था खुद के खर्च पर निर्माण कार्य पूरा करेगी। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही होने पर कार्रवाई जरुर होगी।