चकिया में चंद्प्रभा साहित्यिक संस्था की ओर से आयोजित गोष्ठी में काव्य पाठ करते कवि। संवाद
चंद्रप्रभा साहित्यिक संस्था की ओर से रविवार को नगर के वार्ड नंबर 6 सिविल लाइन पूर्वी स्थित आदित्य पुस्तकालय परिसर में मासिक काव्य गोष्ठी हुई। गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं से देश दुनिया के वर्तमान स्थिति को बयां किया। राजेश बेनजीर ने अपनी कविता के माध्यम से देश की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला तुमने बोला मान लिया मैं कॉकरोच हूं, लेकिन क्या तुम मान सकोगे दीमक सा है तेरा काम। राजेश विश्वकर्मा राजू ने ऐब से होला अपने अनजान आदमी, राखे दूसरा पे हरदम धियान आदमी सुनाकर वर्तमान परिवेश में इंसानियत पर ध्यान आकृष्ट कराया। काव्य गोष्ठी की शुरुआत तेजबली अनपढ़ ने वाणी वंदना कर की।
संस्था के अध्यक्ष बेचई सिंह मालिक ने जब गैस बन ही रहि है पेट में तो कच्चा अंग चबाओ, सिलिंडर के लिए मत घबराओ,मोदी की महंगाई की महिमा सुनाकर सरकार पर व्यंग किया। जगजीवन जी, मिथिलेश सिंह, बंधु पाल बंधु, मनोज द्विवेदी मधुर, तेजबली अनपढ़, हरिवंश सिंह बवाल, अलियार प्रधान ने कविता सुनाई।