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Chandauli News: सफाई के दावों पर कूड़ा, तीन धार्मिक पोखरों में तैर रहा कचरा, बदबू से लोग हो रहे परेशान

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पीडीडीयू नगर के मानसरोवर तालाब में लगा कूड़े का ढेर। संवाद
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पीडीडीयू नगर। केंद्र और प्रदेश सरकार जल संरक्षण, अमृत सरोवर और स्वच्छ भारत जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। दूसरी ओर चंदौली जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के पोखरे कूड़ा निस्तारण केंद्र बनते जा रहे हैं। नगर के मानसरोवर पोखरा, दामोदरदास पोखरा सहित कई जलाशयों में कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक, सड़ी-गली सब्जियां और अन्य अपशिष्ट खुलेआम फेंके जा रहे हैं। इससे चारों ओर दुर्गंध फैलने लगी है और जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।
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जिन तालाबों पर छठ महापर्व, कार्तिक स्नान, जीवित्पुत्रिका व अन्य धार्मिक आयोजनों में हजारों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं, उन्हीं स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नगर पालिका के नियमित सफाई के दावे झूठे दिख रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाबों के चारों ओर कूड़े के ढेर लगे हैं।
प्लास्टिक की थैलियां, पूजा सामग्री, घरेलू कचरा और बाजार का अपशिष्ट पानी में डाला जा रहा है। कचरा सड़ने और बदबू के कारण आसपास के लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो रहा है। तालाबों के आसपास डस्टबिन की व्यवस्था नहीं है। जिम्मेदार विभागों की ओर से न तो निगरानी की जा रही है और न लोगों को रोकने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई दे रही है।
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दूषित पानी से जलजीवों की मौत, मच्छरों का प्रकोप और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घटने और प्रदूषण बढ़ने से जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ रहा है। यदि सफाई नहीं कराई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।



केस-1
मानसरोवर तालाब में महीनों से सड़ रहा कूड़ा
पीडीडीयू नगर के सबसे बड़े मानसरोवर तालाब में भगवान सूर्य का मंदिर स्थित है और साल में दो बार छठ महापर्व पर हजारों श्रद्धालु अर्घ्य देने के लिए जुटते हैं। इस तालाब में आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग खुलेआम कूड़ा फेंक रहे हैं। तालाब किनारे बैठने वाले लोग प्लास्टिक, बोतलें और खाद्य सामग्री के अवशेष पानी में फेंक देते हैं। इससे तालाब का पानी काला पड़ने लगा है और दुर्गंध फैल रही है। लंबे समय से समुचित सफाई न होने के कारण हालात बदतर होते जा रहे हैं।



केस-2
दामोदरदास पोखरा के चारों तरफ जमा हुई गंदगी
नगर का दामोदरदास पोखरा भी उपेक्षा का शिकार है। यहां छठ पूजा, कार्तिक स्नान, जीवित्पुत्रिका समेत अन्य धार्मिक आयोजनों में हजारों श्रद्धालु जुटते हैं। इसके अलावा मूर्ति विसर्जन भी इसी पोखरे में किया जाता है। इसके बावजूद पोखरे के चारों ओर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। कई स्थानों पर प्लास्टिक और घरेलू कचरा महीनों से सड़ रहा है। लोगों का कहना है कि नियमित सफाई का दावा केवल कागजों तक सीमित है।



केस-3
चंदासी पोखरे का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर
चंदासी पोखरा काफी बड़ा हुआ करता था लेकिन सिक्स लेन सड़क बनने के बाद मंदिर हटाया गया और उस मंदिर को पोखरे में ही मिट्टी भरकर बनाया जा रहा है। इससे पोखरा की चौड़ाई कम हो गई है। आसपास के लोग और दुकानदार उसमें ही कूड़ा और गंदगी डालते हैं। यही नहीं कई घरों का गंदा पानी सीधे पोखरे में ही गिराया जा रहा है। प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण का दावा कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों को यह नहीं दिखाई दे रहा है।



इनसेट-



किसी तालाब पर एक डस्टबिन तक नहीं
नगर के जिन प्रमुख तालाबों पर प्रतिदिन सैकड़ों लोग पहुंचते हैं और पर्व-त्योहारों पर हजारों श्रद्धालु जुटते हैं, वहां नगर पालिका की ओर से एक भी स्थायी डस्टबिन नहीं रखी गई है। लोग मजबूरी में या लापरवाही से कूड़ा तालाब के किनारे अथवा सीधे पानी में फेंक देते हैं। यदि प्रत्येक प्रमुख घाट पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाई जाए और नियमित कूड़ा उठान हो, तो काफी हद तक समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।



लोग बोले-
मानसरोवर और दामोदरदास पोखरे में छठ पूजा और कार्तिक स्नान में हजारों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन इनकी हालत देखकर दुख होता है। चारों तरफ कूड़ा फैला है और बदबू आती है। प्रशासन को नियमित सफाई करानी चाहिए और कूड़ा फेंकने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए। - कृष्ण गुप्ता, अलीनगर
तालाबों के आसपास एक भी डस्टबिन नहीं है। लोग यहां कूड़ा फेंक रहे हैं। एक ओर प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने का दावा किया जाता है, दूसरी ओर पोखरों की नियमित सफाई तक नहीं होती। कोई सफाईकर्मी झाड़ू लगाने भी नहीं आता। - सोनू सिंह, पीडीडीयू नगर
तालाब हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत हैं। कूड़ा फेंकने से पानी दूषित हो रहा है और जलीय जीव मर रहे हैं। प्रशासन को सफाई अभियान चलाने के साथ लोगों को जागरूक करना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने। - ओमप्रकाश रजक, पीडीडीयू नगर
छठ पूजा में हम इन्हीं तालाबों पर पूजा-अर्चना करने आते हैं। तालाबों की हालत देखकर पीड़ा होती है। चारों ओर गंदगी फैली है। प्रशासन को नियमित सफाई कराने के साथ तालाबों के आसपास कूड़ा फेंकने वालों पर जुर्माना भी लगाना चाहिए। - कुमार नंदजी, पीडीडीयू नगर



इनसेट



ऐसे हो सकता है समाधान
- प्रमुख तालाबों के आसपास पर्याप्त डस्टबिन रखे जाएं।
- प्रतिदिन कूड़ा उठान और नियमित सफाई कराई जाए।
- तालाबों में कूड़ा फेंकने वालों पर जुर्माना लगाया जाए।
- ऐसे स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
नगर पालिका और सामाजिक संगठनों के सहयोग से स्वच्छता अभियान चलाया जाए।



कोट
जिन पोखरों और तालाबों में पूजा-पाठ होता है, उनकी समय-समय पर सफाई कराई जाती है। लोगों से अपील है कि वे वहां गंदगी न फैलाएं और जलाशयों को स्वच्छ रखने में सहयोग करें।
- सोनू किन्नर, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, पीडीडीयू नगर

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