नौगढ़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहली बार मंगलवार को डॉक्टरों ने गर्भवती महिला का ऑपरेशन करके सफल प्रसव कराया। ऑपरेशन से महिला ने बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने अस्पताल में मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। क्षेत्र में भी यह सूचना आग की तरह फैल गई और लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई।
नौगढ़ इलाके की गरीब महिलाओं को प्रसव के लिए 50 किमी दूरी तय कर चंदौली आना पड़ता था। नौगढ़ में 18 मई को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सीएचसी का निरीक्षण कर कहा था कि यहां ऑपरेशन होना चाहिए। जिसको स्वास्थ्य विभाग ने संजीदगी से लिया। मंगलवार को देवखत निवासी परमहंस यादव की पत्नी नीलम (25) को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उसे सीएचसी लेकर आए। जहां पर उसका सामान्य प्रसव नहीं हो सका। इसके बाद सर्जन डॉ.रोमा, एनेस्थीसिया के डॉ अनुप, डॉ अवंतिका, स्टाफ नर्स बसन्ती ने आपरेशन करके सफल प्रसव कराया। बता दें कि इससे पहले आपरेशन की स्थिति वाले केस यहां से जिला महिला अस्पताल रेफर किए जाते थे। इनमें से कई बार हालत गंभीर होने पर तीमारदार जिला मुख्यालय न ले जाकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराते थे। जहां पर उन्हें जेवर गिरवी रखकर 30 से 35 हजार रुपये देना पड़ता था।चिकित्सा अधीक्षक डॉ अवधेश पटेल ने बताया कि यह पहला खुशी का मौका है जब सीएचसी नौगढ़ की ओर से जन सामान्य को चिकित्सा की सेवाएं दी जा रही हैं। मुझे खुशी है कि हमारे शल्य चिकित्सक दल ने ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जन सामान्य हमेशा सामान्य प्रसव की तरह शल्य से संबंधित प्रसव की सेवाएं भी प्राप्त करेंगे।
नौगढ़। सीजेरियन ऑपरेशन से परमहंस यादव के घर बेटी हुई है। पिता परमहंस ने बताया कि डाक्टरों ने जैसे ही ऑपरेशन की बात की थी, तो परेशान हो गए थे। लगा था कि खर्च बहुत आएगा। किस-किस से कर्ज लेंगे, लेकिन तब अधीक्षक साहब आए और कहा कि पैसों की कोई जरूरत नहीं, सीएचसी में ही ऑपरेशन होगा। यह सुनते ही पहले तो उसे विश्वास नहीं हुआ, लेकिन डाक्टरों ने कर दिखाया। बच्ची की मां नीलम का कहना है कि परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि सीजेरियन ऑपरेशन से प्रसव कराने की वह सोच भी पाते, लेकिन यहां न सिर्फ उनकी समस्या का सुखद समाधान उन्हें मिला है, बल्कि उन जैसे समाज के कई तबके के लोगों के लिए भी एक नई राह खुल गई है।
बच्ची की मां नीलम बोली, अस्पताल में सिर्फ एक रुपये का पर्चा बना था। इसके बाद कोई भी खर्च दवा व जांच के नाम पर नहीं हुआ। संवाद