पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर और डॉ. नूतन ठाकुर ने किशोरी की संदिग्ध हाल में हुई मौत के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना सीबीआई से कराने की मांग की है। अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि किशोरी की गत 12 जून की रात जिला चिकित्सालय सोनभद्र में मौत होने और बिना पोस्टमार्टम अस्पताल से लाश देने सहित तमाम संदिग्ध तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कई बार मांग की थी, मगर किसी अफसर ने इनका संज्ञान नहीं लिया।
किशोरी के दादा ने स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) चंदौली के समक्ष धारा 156(3) सीआरपीसी में वाद दायर किया। उसमें थाना बबुरी ने अपनी चार जुलाई की आख्या में दोषियों के बचाव का पूरा प्रयास किया, जो कोर्ट के आदेश में भी लिखा है। लेकिन, कोर्ट ने उस आख्या को पूरी तरह दरकिनार करते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
इसके बाद भी सात दिन तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। अंत में 14 जुलाई को एफआईआर दर्ज हुई। अमिताभ और नूतन ने आरोप लगाया कि इस मामले में चंदौली पुलिस अभी तक अभियुक्तों के पक्ष में काम कर रही है। चंदौली पुलिस की अब तक की कार्यप्रणाली से स्पष्ट है कि इस मामले में उनके स्तर से न्याय संभव नहीं है। अत: मामला सीबीआई को सौंपा जाना जरूरी है।
जब आरोपी रसूखदार हों तो किसी कमजोर को न्याय मिलना कितना कठिन है यह बबुरी थाना क्षेत्र निवासी मृत किशोरी के दादा के संघर्ष से समझा जा सकता है। वह पोती को न्याय दिलाने के लिए हर चौखट पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि आरोपियों ने रसूख का इस्तेमाल कर किशोरी के शव का पोस्टमार्टम नहीं होने दिया।
मृत किशोरी के दादा के मुताबिक उसकी पोती पूर्व ब्लॉक प्रमुख शिवेंद्र सिंह के करीबी अजय पाठक के घर झाड़ू पोछा करती थी। 12 जून को वह अजय पाठक के घर पर काम करने गई थी। दूसरे दिन उसके सोनभद्र में होने की सूचना सुकृत पुलिस से मिली। दादा के अनुसार कि सूचना के बाद शिवेंद्र सिंह और अजय पाठक किशोरी के माता पिता को लेकर अपने वाहन से उसका शव लाने सोनभद्र गए थे।
पोती के शव पर भूसा लगा हुआ था। साफ था कि उसकी मौत स्वाभाविक नहीं थी। आरोप लगाया कि दुष्कर्म के बाद उसे जहर दे दिया गया था। आरोपियों के दबाव में संदिग्धहाल में मौत के बाद भी डाक्टरों या पुलिस की ओर से शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। जबकि नियमत: पोस्टमार्टम कराना जरूरी था।
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने इस मामले में कई सवाल उठाए। उधर, दादा ने आईजी के यहां प्रार्थना पत्र देकर इस मामले प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की। इससे एक बारगी मामला तूल पकड़ता दिखा तो किशोरी के पिता ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर कहा कि पूर्व प्रमुख ने हमारी मदद की। इस पर पुलिस फिर ठंडी पड़ गई। इसके बाद दादा ने पॉक्सो कानून के तहत गठित विशेष न्यायालय में गुहार लगाई थी। कोर्ट के आदेश के एक सप्ताह बाद 14 जुलाई को बबुरी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।