विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बिजली विभाग के
कर्मचारियों ने आठ सूत्री मांगों को लेकर बुधवार को एक्सईएन कार्यालय के
बाहर धरना दिया।
कर्मचारियों ने विद्युत निगमों में कार्यरत और
पेंशनधारी कर्मचारियों और अधिकारियों को मिली एलएमवी-10 की सुविधा में
कटौती के विरोध में आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी।
कर्मचारियों का
कहना है कि राज्य विद्युत परिषद के कर्मचारियों और पेंशनधारियों को पूर्व
में एलएमवी-10 की सुविधा किसी न किसी रूप में मिलती रही है।
विद्युत
उत्पादन, पारेषण और वितरण क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को यह सुविधा
समय-समय पर हुए समझौतों और आदेशों के फलस्वरूप विभागीय सुविधा के रूप में
प्राप्त है।
साथ ही राज्य और केंद्र के सभी विभागों में विभागीय सुविधा या
अन्य तरह के लाभ के रूप में प्रदत्त सुविधाएं आज भी चली आ रही हैं। कहा कि
जनवरी 2000 को उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा विभाग और कर्मचारी नेताओं के
मध्य हुए समझौते में यह भी सहमति बनी थी कि कर्मचारियों से प्राप्त
सुविधाओं में किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी। यह समझौता केंद्र सरकार
के प्रतिनिधि की उपस्थिति में हुआ था।
लेकिन एलएमवी-10 की सुविधा में
कटौती की जा रही है। इससे कर्मचारियों की कार्य क्षमता प्रभावित होगी,
जिसका असर विद्युत उत्पादन और पारेषण पर भी पड़ना तय है।
धरने के माध्यम
से उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को चेताया कि यदि कटौती
का आदेश वापस नहीं लिया गया, तो कर्मचारी बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू कर
देंगे।
इस अवसर पर राधेश्याम, शिवकुमार, राजकुमार, धर्मेंद्र मल्ल, डीके
पांडेय, संजय कुशवाहा, दिनेश, सोनू, मनोज आदि उपस्थित रहे।