पीडीडीयू नगर। चंदौली सहित पूर्वांचल के जिलों को जोड़ने वाले रिंग रोड फेज दो का काम शुरू हो गया है। करीब 60 किमी लंबी इस रिंग रोड में 27 किमी की सड़क जिले में बननी है। इसके निर्माण से चंदौली के अलावा बिहार सहित पूर्वांचल के कई जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा। लगभग 175 करोड़ की लागत से बनने वाले 27 किमी लंबे फोर लेन मार्ग का कार्य मार्च 2022 तक पूरा होगा।
वर्ष 2001 में रिंग रोड का खाका तैयार किया गया था लेकिन इसका निर्माण कार्य 2016 में शुरू हुआ। पहले फेज में वाराणसी के संदहा (चिरईगांव ब्लाक) से हरहुआ ब्लाक के वाजिदपुर तक लगभग 16 किमी लंबी सड़क बनाई गई। इस पर आवागमन भी शुरू हो चुका है। दूसरे फेज में 17 किमी लंबी सड़क वाजिदपुर से राजातालाब कछवा में एनएच दो तक और चंदौली के कुंडाखुर्द से पचफेड़वा तक करीब 27 किमी लंबी सड़क एनएच दो को जोड़ेगी। इसके बन जाने से बिहार के अलावा चंदौली सहित पूर्वांचल के कई जिले इससे जुड़ जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जिले में बनने वाली रिंग रोड के पूरा करने की मियाद मार्च 2022 तक रखा है। इसका निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो चुका है।
पीडीडीयू नगर। वाराणसी और चंदौली के बीच बनने वाली तकरीबन 60 किमी लंबी रिंग एनएच दो से जुड़ने के बाद पूर्वांचल सहित बिहार के पटना, गया को लखनऊ तक की दूरी कम हो जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश के अंदर चंदौली से वाराणसी, लखनऊ, जौनपुर, सुल्तानपुर, गाजीपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया के लिए सफर आसान होगा। इससे लोगों को वाराणसी और अन्य शहरों में लगने वाले जाम से निजात मिलेगी। जिससे समय तो कम लगेगा ही कम दूरी तय करनी होगी और पैसे की बचत के साथ सहूलियत से अपने गंतव्य को आ जा सकेंगे।
दो जिलों में बनने वाले रिंगरोड पूर्वांचल के चार राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ती है। राजातालाब में राष्ट्रीय राजमार्ग दो (पुराना ग्रैंडट्रैंक रोड) से शुरू होकर वाराणसी-जौनपुर-सुल्तानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 56, वाराणसी-आजमगढ़-अंबेडकर नगर से नेपाल बार्डर तक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 और वाराणसी से गाजीपुर, गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 29 को जोड़ती है।
वाराणसी के राजातालाब से शुरू होकर चंदौली जिले के पचफेड़वा (लौंदा झांसी) तक बनने वाली तकरीबन 60 किमी लंबी रिंग रोड 27 किमी चंदौली जिले में बननी है। इसका निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। मार्च 2022 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
एसबी सिंह, परियोजना निदेशक, एचएचएआई।