तीन साल में ऐसे घटी बच्चों की संख्या
- 2022 : 710 छात्र
- 2023 : 627 छात्र
- 2024 : 527 छात्र
2025 : 531 छात्र (सिर्फ 4 की बढ़ोतरी भी शिक्षकों की घर-घर मुहिम का नतीजा)
नियम क्या कहते हैं?
सड़क निर्माण के दौरान अगर मार्ग के किनारे स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थल हों, तो एप्रोच कट, अंडरपास, चेतावनी बोर्ड और जेब्रा क्रॉसिंग अनिवार्य रूप से बनाया जाना चाहिए। लेकिन सिक्स लेन बनाने वाली कार्यदायी संस्था ने इन नियमों की अनदेखी कर बच्चों की जान को खतरे में डाल दिया है।
क्या कहते हैं अभिभावक और बच्चे?
सिक्स लेन पर न पुल है न जेब्रा क्रॉसिंग। बच्चों को भेजने में रोज़ डर लगता है। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। - रियाजुद्दीन, अभिभावक
हमारे घर के तीन लोग यहां पढ़ते हैं। पढ़ाई अच्छी है, लेकिन रोड क्रॉस करने में बहुत डर लगता है। पड़ोस के कई अभिभावकों ने बच्चों को भेजना बंद कर दिया। - रोहन पटेल, कक्षा 5
गांव के लोग सड़क पार करने के डर से बच्चों को अब निजी स्कूल भेज रहे हैं। पर हम मजबूरी में रोज़ सिक्स लेन पार करते हैं। बहुत डर लगता है। - चंचल पटेल, कक्षा 8
तीन बजे छुट्टी के बाद हम छह शिक्षक मिलकर बच्चों को रस्सी से सड़क पार कराते हैं। वाहन चालक सुनते नहीं। रोज़ किचकिच करनी पड़ती है। स्कूल आने के समय बच्चों को दिक्कत होती है। - शशि सिंह, प्रधानाध्यापिका
जहां स्कूल हैं, वहां जेब्रा लाइन व अन्य इंतज़ाम बनाए जाएंगे, लेकिन ये काम निर्माण पूरा होने के बाद होता है। फिलहाल बच्चों के सुरक्षित आने-जाने के लिए अस्थायी व्यवस्था कराने पर विचार कर रहे हैं। - राजेश कुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी