अमर उजाला ने अमर उजाला ने 05 दिसंबर के अंक में 'बिना लाइसेंस मीट की 150 से ज्यादा दुकानें चल रहीं' शीर्षक खबर प्रकाशित की थी। जिस पर खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के साहयक आयुक्त कुलदीप सिंह, एसडीएम अनुपम मिश्रा, सीओ कृष्ण मुरारी शर्मा और न्रगर पालिका के प्रभारी ईओ राजीव मोहन सक्सेना के साथ कसाब महाल पहुंचे।
यहां टीम ने बिना लाइसेंस के चल रही मीट मुर्गे की दुकानों के बाहर रखी जाली, खोके आदि सामान समेत मीट और मुर्गा काटने में इस्तेमाल होने वाले औजारों को जब्त कर लिया। इसके बाद दुकानों को बदं करवा दिया। विभाग की ओर से की गई इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। वहीं टीम ने जीटीआर ब्रिज के किनारे चल रही मुर्गे की दुकानों को बंद करवाया।
वहां हुए अतिक्रमण को जेसीबी की मदद से ध्वस्त करवा दिया। इस मौके पर 16 दुकानों को बंद करवाया। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कुलदीप सिंह ने बताया कि बिना लाइसेंस के चल रही दुकानों को बंद करवा दिया गया है। यदि बिना लाइसेंस के दुकानेंं खुली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पांच दिसंबर को छपी इसी खबर का दिखा असर।
- फोटो : संवाद
मांस, मछली एवं मुर्गे की दुकानों के लाइसेंस के लिए ये हैं नियम
पीडीडीयू नगर। मांस, मछली एवं मुर्गे की दुकानों के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत बताये गये मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
- - दुकान मन्दिर/पूजा स्थल से कम से कम 100 मीटर की दुरी पर होनी चाहिए
- विद्यालयों से भी लगभग 50 मीटर की दुरी होनी चाहिये
- दुकानों में गहरे रंग के पर्दे या गहरे रंग के शीशे होने चाहिये
- मांस कारोबारी के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र होने चाहिये
- शहरी क्षेत्र में नगर पालिका, नगर पंचायत द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध होना आवश्यक है
- नजदीकी पुलिस थाने द्वारा भी एनओवी होना अनिवार्य
- कोई भी कारोबारी अपनी दुकान पर मांस का कटान नहीं करेगा
- स्लाटर हाउस न होने की दशा में अन्य नजदीकी जनपद से मांस का कटान कराते हुये डीप फ्रीजर में मांस का परिवहन कर अपनी दुकान पर लाया जाना चाहिए
- समस्त धारदार हथियार स्टील के होने चाहिए
- कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए
- स्लाटर हाउस से लाये जाने वाले मांस का पूरा हिसाब किताब होना चाहिए
वर्षों से बंद पड़ा है स्लाटर हाउस
नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत कसाब महाल में नगर पालिका की ओर से एक स्लाटर हाउस का संचालन किया जाता था। जहां से नगर पालिका को राजस्व की प्राप्ति भी होती थी। बाद में उसे बंद कर दिया गया। ऐसे में जिले में अब एक भी स्लाटर हाउस नहीं है।