पीडीडीयू नगर। कोरोना संक्रमण में स्कूल व कॉलेज बंद होने के कारण बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑनलाइन तरीकों को माध्यम बनाया गया। विभिन्न एप के माध्यम से बच्चों की ऑनलाइन क्लास चली। उन दिनों बच्चे कई घंटे मोबाइल, लैपटॉप व टैबलेट से चिपके रहे। इसके चलते बच्चों के स्वाभाव में परिवर्तन आ गया है। बाहर दोस्तों संग खेलने कूदने के बजाय बच्चे मोबाइल से चिपके रहते हैं। कई तरह के गेम की जानकारी उन्हें हो चुकी है और चोरी चुपके उसपर समय बिता रहे हैं इससे उनकी पढ़ाई खराब हो रही है।
कोरोना संक्रमण काल में शैक्षणिक संस्थान बंद थे। शिक्षा में व्यवधान न हो इसके लिए ऑनलाइन का विकल्प मिला। इससे जहां शिक्षण प्रणाली बदल गई, वहीं शिक्षक से लेकर विद्यार्थी तक हाईटेक हो गए। लेकिन इसका नकारात्मक पक्ष यह रहा कि इससे बच्चों की आदतें भी बिगड़ने लगीं। कल तक दोस्तों के साथ खेलने कूदने की आदत को छोड़ बच्चों ने मोबाइल थाम लिया और अधिकतर वक्त मोबाइल के साथ अकेले में बिताने लगे। इस आदत में बच्चों के स्वभाव में विकृति पैदा कर दी है। सत्यदेव यादव ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई के चक्कर में बच्चों को मोबाइल की लत सी लग गई है। बच्चों के स्वभाव में चिड़चिड़ा पन सा आ गया है। मोबाइल देखने से मना करने पर बच्चें नाराजगी तक व्यक्त करने लगे है। महेश गुप्ता ने कहा कि उनकी बेटी कक्षा एक में पढ़ती है। ऑनलाइन क्लास के करने के लिए बच्चे को मोबाइल उपलब्ध कराया गया लेकिन अब उसे मोबाइल में गेम खेलने की आदत पड़ गई है। कमलेश मौर्या ने बताया कि ऑनलाइन क्लास ने बच्चों की हैंड राइटिंग पर भी बुरा असर डाला है। वहीं बच्चों में किताब पढ़ने की आदत में भी कमी आई है। श्यामसुंदर पाल ने बताया कि कोरोना काल में करीब दो साल घर पर रहने वाले बच्चे अब कक्षाओं में पढ़ाई से भी जी चुराने लगे हैं। बच्चों में मोबाइल इस्तेमाल की लत बढ़ी है।