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क्षतिग्रस्त सड़कें लोगों में परोस रहीं बीमारियां

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पीडीडीयू नगर। जनपद की अधिकांश सड़कों का हाल बेहाल है। इन सड़कों पर चलने से राहगीर कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं मगर जिम्मेदार खामोश हैं। गड्ढों में तब्दील हो चुकी इन सड़कों पर वृद्धों व बच्चों का चलना तो मुश्किल हो गया है। इन सड़कों को पहले 31 अक्तूबर फिर 15 नवंबर तक शासन से मरम्मत के निर्देश दिए गए थे मगर लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से अब तक सड़कों का काम पूरा नहीं हो सका।
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सड़कों पर बने गड्ढों के कारण लोगों को हड्डियों से संबंधी कई बीमारियां हो रही हैं। वहीं सड़क पर उड़ रही धूल से श्वास संबंधी बीमारियां हो रही हैं। जनपद की ऊबड़-खाबड़ हो चुकी सड़कों पर चलने से लोगों में जोड़ों का दर्द सहित स्पांडीलाइटिस जैसी बीमारी हो रही है। इसके अलावा धूल के कारण लोग एलर्जी, साइनस, आखों में जलन जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। सड़कों पर उड़ने वाली धूल के कारण सड़क स्पष्ट रूप से नजर नहीं आती और दुर्घटना हो जाती है। प्रतिवर्ष सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे हैं। जनपद की प्रमुख क्षतिग्रस्त सड़कों में पीडीडीयू नगर से चकिया व सकलडीहा, चहनिया से मारूफपुर, पीडीडीयू नगर व सकलडीहा, सकलडीहा कस्बा से रेलवे स्टेशन, अमड़ा से धीना, कंदवा से ककरैत सहित कई शामिल हैं। इन सभी सड़कों पर धूल व बिखरी गिट्टियां ही बची हैं जो आवागमन में बाधक हैं। शासन ने पहले 31 अक्तूबर तक सभी प्रमुख सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश दिया था लेकिन देर तक हुई बारिश के कारण तय समय सीमा को बढ़ाकर 15 नवंबर कर दिया था। इसकेे बाद भी सड़कें बदहाल हैं।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में मार्च 2020 तक 40 सड़कों की नई सौगात मिलेगी। लोक निर्माण विभाग ऐसी सड़कों के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। 26 करोड़ की लागत से 84 किमी से अधिक की सड़कें बनाई जानी है। विभाग को पांच करोड़ से अधिक की धनराशि भी मिल चुकी है और काम शुरू हो चुका है। विभाग के एक्सईएन डीपी सिंह ने बताया कि लगभग आधा दर्जन सड़कों को बनवा दिया गया है। शेष पर तेजी से कार्य चल रहा है।
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क्षतिग्रस्त सड़कों पर उड़ने वाली धूल फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाती है। इससे एलर्जी, साइनस, आंखों में जलन जैसी बीरियों के होने की संभावना बनी रहती है। मास्क लगाकर यात्रा करने से कुछ हद तक बीमारियों की चपेट में आने से बचा जा सकता है। डा. प्रदीप गुप्ता, हृदय रोग विशेषज्ञ।
इन सड़कों पर वाहन चलाने से कमर, घुटने व गर्दन में दर्द होने की संभावना बनी रहती है। इतना ही नहीं कई बार तो लोग स्पोंडिलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के शिकार भी हो जाते हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए व्यायाम करते रहना अत्यंत आवश्यक हैं। डा. विनोद बिंद, हड्डी रोग विशेषज्ञ।
लोगों के कोट.........
बरसात के बाद क्षतिग्रस्त हो चुकी धूल व गिट्टी से पटी सड़कों पर चलना काफी मुश्किल हो गया है। सड़कों की दुर्दशा के कारण आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। बावजूद इसके सड़कों की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। धर्मेंद्र यादव, कुरहना।
टेलीफोन व जलनिगम जैसे विभाग कई बार कार्यों के चलते सड़कों को खोदकर छोड़ देते हैं। इससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। सड़कों को बनवाने के लिए विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी ठहराते रहते हैं। इससे लोग बीमार हो रहे हैं। सोनू सिंह, अलीनगर।
सड़कों की मरम्मत के लिए जिम्मेदार विभाग की उदासीनता राहगीरों पर भारी पड़ रही है। टैक्स देने के बाद भी लोगों को चलने के लिए अच्छी सड़कें नहीं मिल पाती हैं। कमर दर्द और सांस के मरीज बढ़ रहे है। दानिश परवेज, शाहकुटी।
क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए विभागों से की गई मौखिक, लिखित व ऑनलाइन शिकायतें बेअसर रहती हैं। वहीं निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी सड़कों की मरम्मत के लिए लापरवाह बने हुए हैं। मनमोहन राय, कंदवा।
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