पीडीडीयू नगर। बरसात के बाद नगर से सटे चंदासी कोल मंडी की हालत बदतर हो गई है। आलम यह है कि सड़क के आसपास तो पानी जमा है ही, सड़क का कई हिस्सा भी पानी में डूबा हुआ है। सड़क पर उड़ने वाली धूल की समस्या तो जैसे नासूर बन चुकी है। सबसे ज्यादा परेशानी दो पहिया वाहन के चालकों व सवारों को हो रही है। सरकार को जिले से सबसे ज्यादा राजस्व देने वाली इस मंडी पर जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की नजर ही नहीं पड़ रही है।
जीटी रोड के किनारे बसी चंदासी कोल मंडी एशिया की सबसे बड़ी कोल मंडी मानी जाती है। यहां ट्रकों के माध्यम से इसीएल का कोयला भारी मात्रा में आता है। मंडी से व्यापारी कोयला खरीदकर देश के विभिन्न भागों में ले जाते हैं। कोयले के यहां होने वाले कारोबार से भारी मात्रा में सरकार को राजस्व प्राप्त होता है। इसके बाद भी इस मंडी की हालत दयनीय बनी हुई है। भारी संख्या में कोयला लदे ट्रकों के आने से मंडी की सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। सड़क पर कई जगह गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों में पानी भर जाने से अन्य वाहन चालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
आलम यह है कि रोड के दोनों किनारे का आधे से अधिक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। बरसात के दिनों में दोपहिया वाहन सवार पानी से भरे गड्ढों में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। वहीं सड़क के किनारे की कच्ची जमीन सरोवर में तब्दील हो गई है। इससे बाहर से आने वाले ट्रकों के चालकों को ट्रक पानी में ही खड़े करने पड़ते हैं। कभी-कभी तो ट्रक पानी भरे गड्ढे में फंस जाते हैं। मंडी के व्यापारियों ने कई बार सड़क की स्थिति सुधारने के लिए जिला अधिकारी व पीडब्ल्यूडी के अधिकारी को पत्रक भी सौंपा लेकिन अभी तक मरम्मत कार्य नहीं किया गया है।
सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाली चंदासी कोल मंडी में किसी प्रकार की सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। शौचालय के नाम पर केवल सुलभ कांपलेक्स है जिसके उपयोग के लिए ट्रकों के चालकों व खलासियों को शुल्क अदा करना पड़ता है। वहीं मंडी में पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। वर्षों पूर्व यहां एक हैंडपंप लगाया गया था जिसका अब कहीं अता-पता नहीं चलता। इससे ट्रकों के चालकों व खलासियों को प्यास बुझाने के लिए यहां की गद्दियों या होटलों का सहारा लेना पड़ता है।
पीडीडीयू नगर से पड़ाव तक करीब आठ किलोमीटर की सड़क को छह लेन की बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन के पास भेज दिया गया है। शासन से धन अवमुक्त होते ही सड़क का निर्माण आरंभ करा दिया जाएगा। इससे मंडी की काफी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। डीपी सिंह, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी।