जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे चुके हैं। इस मामले को लेकर राजनीति भी काफी गरम हो गई है। विपक्षी दल लगातार प्रदेश सरकार व पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर रहे है। मनराजपुर मामले में किरकिरी होने के बाद शासन स्तर से पूरे मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी है।
सीबीसीआईडी ब्रांच सीधे तौर पर शासन के निर्देशों पर कार्य करती है। वह किसी भी विवेचना में सभी पहलुओं को परखती है। इसके लिए वैज्ञानिक, कानूनी एंव सभी तर्को की कसौटी पर कसा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर सीबीसीआईडी घटना का रिक्रियेशन भी करती है।
इसके बाद अपनी डीएफआर सीबीसीआईडी के एसपी को सौंपी जाती है। विवेचना में सामने आये सभी पहलुओं को एसपी की ओर से समझने के बाद उसे उच्चाधिकारियों को सौंपा जाता है। अंत में रिपोर्ट डीजी सीबीसीआईडी तक पहुंचती है।
जहां डीजी व ज्वाईंट डायरेक्टर प्रास्क्यूशन पूरी रिपोर्ट वैज्ञानिक और कानूनी तथ्यों को बारीकी से परखते हैं। संतुष्ट होने पर उसे शासन को भेज दिया जाता है। वहीं असंतुष्ट होने पर उसे उचित निर्देशों के साथ फिर से विवेचना के लिए वापस भेज दिया जाता है।