चंदौली। जनपद प्रदेश में धान के कटोरे के नाम से विख्यात है पर यहां फैली नहरें सिंचाई विभाग की उपेक्षा से दम तोड़ने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। एक ओर राज्य कृषि व मौसम विभाग किसानों को धान की रोपाई के लिए खेतों को तैयार करने की सलाह दे रहा है तो वहीं जिले की अधिकांश नहरें व माइनर झाड़-झंखाड़ से पटी हैं। नहरों का हाल देखकर किसान चिंता में पड़े हुए हैं। नहरों का जाल बिछा होने के बाद भी किसानों को सिंचाई के लिए निजी संसाधनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उनकी खेती की लागत बढ़ जाती है और मुनाफा कम हो जाता है।
जिले में लगभग एक लाख 27 हजार हेक्टेयर खेती योग्य भूमि की सिंचाई के लिए नहरों और माइनरों का जाल बिछा है। इसके अलावा जगह-जगह राजकीय नलकूप भी लगे हैं लेकिन प्रत्येक वर्ष किसानों को पीक सीजन में पानी के लिए जूझना पड़ता है। जनपद में लगभग 1135 किमी क्षेत्रफल में फैली मुख्य तीन नहरों के अलावा 357 रजवाहों का जाल फैला हुआ है। इसमें चंद्रप्रभा, मूसाखांड और लघुडाल नहर सिंचाई प्रखंड से संबंधित नहरें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 272 नलकूप भी हैं। विडंबना यह है कि इनके मरम्मत और रखरखाव के प्रति उदासीनता बरती जाने के कारण नहरें क्षतिग्रस्त और झाड़-झंखाड़ से पटी हुई हैं। इन नहरों और नलकूपों की मरम्मत के लिए प्रति वर्ष शासन की ओर से भारी बजट पास होता है। बावजूद इसके नलकूपों और नहरों की दशा जर्जर है। हालांकि विभागीय लोगों का दावा है कि सफाई का कार्य हर वर्ष कराया जाता है। जनपद में नरायनपुर पंप कैनाल, लघु डाल, सिंचाई प्रखंड, मूसाखांड और चंद्रप्रभा प्रखंड के तहत आने वाली नहरों का जाल बिछा हुआ है। इसके बाद भी खेती योग्य भूमि पानी से सिंचित नहीं हो पाती है। विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि बैठकें कर कागजी कार्रवाई पूर्ण कर लेते हैं लेकिन धरातल पर सब कुछ टांय-टांय फिस्स ही रहता है।
तराजावीनपुर। क्षेत्र के लगभग एक दर्जन माइनर साफ-सफाई के अभाव में झाड़-झंखाड़ व सिल्ट से पटे पड़े हैं। इससे धान की खेती के समय खेतों तक पानी पहुंचने में काफी परेशानी होगी। विभागीय अधिकारियों की इस लापरवाही के प्रति किसानों में नाराजगी है। धान की नर्सरी डालने का समय नजदीक आ रहा है। वहीं विभागीय उदासीनता व उपेक्षा के कारण अभी तक किसी भी माइनरों की सफाई नहीं की जा सकी है। इससे किसानों के खेतों तक पानी पहुंचने में काफी समस्या होगी।
कंदवा। नरायनपुर पंप कैनाल से निकली अमड़ा बड़ी नहर और जलालपुर माइनर झाड़-झंखाड़ से पटी पड़ी है। इससे टेल के खेतों तक पानी पहुंचने में परेशानी होगी। किसानों ने अधिकारियों से कई बार शिकायत की लेकिन स्थिति यथावत बनी हुई है।
अमड़ा बड़ी नहर से कंदवा, कोरमी, बकौड़ी, असना और जलालपुर माइनर से सुढना, कंजेहरा, डेढ़गांवा, जलालपुर आदि गांवों में खेतों की सिंचाई होती है। वर्तमान में अमड़ा बड़ी नहर और जलालपुर माइनर झाड़-झंखाड़ से पटी है। किसान संतविलास सिंह, रविंद्र सिंह मुन्ना, गुलाब यादव, संतोष, सतीश आदि का कहना है कि नहर व माइनर की साफ-सफाई के लिए कई बार सिंचाई विभाग से गुहार लगाई गई लेकिन आज तक साफ-सफाई नहीं कराई गई है। अब एक बार फिर धान की खेती का समय आ गया है लेकिन सिंचाई की समस्या मुंह बाए सामने खड़ी है।
चकिया/ शिकारगंज। लेफ्ट कर्मनाशा मुख्य नहर के हेड के सुदृढ़ीकरण की 11.5 करोड़ की कार्ययोजना फाइलों में ही रह गई है। कार्ययोजना को शासन में भेजे दो वर्ष बीत जाने के बाद भी धन का आवंटन नहीं हो सका है ।इससे सिंचाई के पीक आवर में नहरों के तटबंध के टूटने की आशंका बनी हुई है।
लतीफशाह से निकली लेफ्ट कर्मनाशा मुख्य नहर चकिया तथा शहाबगंज विकास खंड के हजारों हेक्टेयर खेतों की लाइफ लाइन मानी जाती है। इस नहर के उद्गम स्थल पर वन क्षेत्र होने के कारण नहर की तली और बैंकों में पुराने पेड़ों की जड़ों का संजाल है व कई स्थान पर केकड़ों की कॉलोनी भी मौजूद है। इससे नहर के फुल गेज से चलने पर केकडों द्वारा मिट्टी चालकर खोखला कर देने व पेड़ों की जड़ों से नहर में कई शोरिया बन जाने से पानी का रिसाव होने से नहर टूटती रहती है। समस्या के समाधान के लिए चंद्रप्रभा प्रखंड सिंचाई विभाग ने हेडसे 1.9 किलोमीटर तक नहर के बैंक व तली को आरसीसी करने के लिए प्रदेश सरकार को वर्ष 2020 में 11.5 करोड़ का प्रस्ताव भेजा था लेकिन कार्य योजना को अभी तक न तो मंजूरी मिली है और न ही धन आवंटन हुआ है। इससे किसान निराश हैं।
नहरों व माइनरों की साफ-सफाई कराई जा रही है। जिन नहरों में झाड़-झंखाड़ हैं उनकी भी शीघ्र सफाई करा दी जाएगी। लेफ्ट कर्मनाशा की कार्य योजना को प्रदेश स्तरपर मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है। परियोजना के स्वीकृत होने व धन आवंटन होने के बाद कार्य आरंभ करा दिया जाएगा। सर्वेशचंद्र सिन्हा, एक्सईएन, चंद्रप्रभा प्रखंड।