ताराजीवनपुर। बढ़ती महंगाई का असर पशु पालकों व किसानों पर भी दिखना शुरू हो गया है। भूसा से लेकर खली, चूनी के दाम बढ़ने के कारण पशु पालन घाटे का सौदा होता जा रहा है। पशु पालकों का मानना है कि डीजल-पेट्रोल के दामों में इजाफा के कारण ढुलाई महंगी हो गई है जिसके चलते पशुओं का चारा भी महंगा हो गया है।
बढ़ती महंगाई पशु पालकों पर भी भारी पड़ती जा रही है। पहले दूध का धंधा अच्छा चल रहा था लेकिन महंगाई का असर धंधे पर पड़ना शुरू हो गया है। पशुपालक धनंजय यादव बताते हैं कि बाजार में पाउडर का दूध बनने के कारण पशुपालकों के दूध में दामों में इजाफा 2018 के बाद नहीं हुआ। बल्कि महंगाई दोगुनी होने से घाटे का सौदा हो चुका है। रामलाल यादव ने बताया कि उनके पास 40 भैंस है। काफी मेहनत के बाद किसी प्रकार परिवारका खर्च चल जाता है। महंगाई का असर इतना हुआ कि पशुओं को पालना मुश्किल होता जा रहा है। मुसे यादव ने बताया कि दौसा से लेकर चोकर चुन्नी, पशु आहार सभी के दामों में काफी इजाफा हुआ है। जबकि दूध के दाम में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जिससे पशुपालक परेशानी का दंश झेलने को मजबूर है। गोवर्धन यादव ने बताया कि किसी प्रकार दूध के लिए पशु तो खरीद लेते हैं लेकिन इसका खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। जो पशु दूध नहीं दे रही है। वह तो पशु पालकों के लिए बोझ बन चुकी है।
इनसेट
सामान दर रुपये में( प्रति किलो)
भूसा- 7.50
चोकर - 26
चूनी - 30
मसूर - 25
तीसी खली - 80
सरसों खली - 38
केसारी - 30
पशु आहार - 30
गुड़ - 40