पड़ाव। बहादुरपुर में चल रही शिव महापुराण कथा में अखिलानंद महाराज ने काशी की आध्यात्मिक महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि काशी भगवान शिव की त्रिशूल पर बसी अविनाशी नगरी है, जिसका प्रलयकाल में भी विनाश नहीं होता।
यहां श्रद्धा और भक्ति के साथ निवास करने वाला व्यक्ति मोक्ष का अधिकारी बनता है, लेकिन इस पावन क्षेत्र में किया गया पाप हजार गुना बढ़ जाता है।
कहा कि काशी में मृतक का दाह संस्कार, दशगात्र, मासिक, सपिंडीकरण, वार्षिक पिंडदान और श्राद्ध जैसे कर्म करने से पितरों को सद्गति प्राप्त होती है और श्रद्धालु स्वयं भी पापों से मुक्त होकर शिवलोक का अधिकारी बनता है। शिव के क्षेत्र में सकाम भाव से किए गए कर्म का फल तत्काल मिलता है, जबकि निष्काम भाव से किया गया कर्म शिवपद की प्राप्ति कराता है।
कथा के दौरान महाराज ने तीर्थों की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान शिव ने जीवों के कल्याण के लिए अनेक शिव क्षेत्रों और तीर्थों की स्थापना की है। तीर्थों में स्नान, ध्यान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। यदि कोई व्यक्ति तीर्थ में जाकर इन धार्मिक कृत्यों की उपेक्षा करता है तो वह रोग, दरिद्रता और अन्य कष्टों का भागी बन सकता है।
इस दौरान कांति जायसवाल, शेखर जायसवाल एवं निधि जायसवाल, अनिल गुप्ता, मनोज श्रीवास्तव, अजय राठौर, अंजलि राठौर, कमलेश तिवारी आदि रहे।