भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी अमित शाह शुक्रवार से फिर राज्य का दौरा शुरू करेंगे। इस बार उनका पड़ाव अयोध्या और गोरखपुर होगा। शाह शुक्रवार को लखनऊ में रहेंगे।
इसके बाद शनिवार को अयोध्या में और रविवार को गोरखपुर में पार्टी की बैठकों में शामिल होंगे। शाह का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शाह 6 जुलाई को अयोध्या के कारसेवकपुरम में आयोजित बैठक को संबोधित करेंगे। कारसेवकपुरम वह स्थान है जो श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन का केंद्रबिंदु रहा है। इसी से पार्टी के रणनीतिकारों की मंशा का पता चल जाता है।
आमतौर पर अवध क्षेत्र की बैठकें लखनऊ में होती रही हैं। लंबे समय बाद यह बैठक न सिर्फ लखनऊ के बाहर आयोजित की गई बल्कि जगह भी फैजाबाद के बजाय अयोध्या तय की गई। अयोध्या में भी कारसेवकपुरम। यह अनायास नहीं है। इसके पीछे पूरी रणनीति छिपी हुई है।
जाहिर है कि शाह इन स्थानों पर भाजपा की बैठक कराकर यह संदेश देना चाहते हैं कि पार्टी अपनी पहचान व आस्था को लेकर प्रतिबद्ध है।
राम जन्मभूमि को पार्टी के एजेंडे में भीतर-बाहर करने का सिलसिला चला हो लेकिन पार्टी अब असमंजस उबर चुकी है। भाजपा न सिर्फ हिंदुत्व व भगवा एजेंडे पर लौट आई है बल्कि राममंदिर उसके एजेंडे में पहले जैसा ही महत्वपूर्ण हो गया है। अयोध्या के बाद गोरखपुर में गोरखपुर क्षेत्र की बैठक बुलाई गई है।
अवध में कमल खिलाना बड़ी चुनौती
शाह के लिए अवध की जमीन काफी चुनौतियों वाली व मुसीबत भरी है। भाजपा के लिए प्रदेश व देश की सत्ता का रास्ता खोलने वाली इस धरती पर लंबे समय से कमल कुम्हलाया पड़ा है।
राम मंदिर एजेंडा मुहैया कराने वाली और भाजपा को भगवा पहचान देने वाली इस धरती पर ही भगवा ब्रिगेड को एक-एक सीट के लिए जूझना पड़ रहा है। पर, स्थिति ठीक नहीं हो पा रही है।
अवध क्षेत्र में लोकसभा की 16 और विधानसभा की 81 सीटें आती हैं। पर, इस समय भाजपा के पास अवध क्षेत्र में लोकसभा की सिर्फ एक सीट वह भी लखनऊ है।
जिस अयोध्या को भाजपा की ताकत माना जाता है। उस अयोध्या फैजाबाद संसदीय सीट पर पिछले दो चुनाव से कमल खिलाना मुश्किल हो रहा है। लगातार पांच बार से भाजपा के कब्जे में चली आ रही विधानसभा की अयोध्या सीट भी इस बार पार्टी के हाथ से निकल गई है।
क्षेत्र में बाराबंकी, हरदोई, सीतापुर, गोंडा, अंबेडकरनगर और रायबरेली सहित कई सीटों पर उम्मीदवारों को टोटा है। जाहिर है कि प्रदेश से भाजपा की सीटें बढ़ाने के लिए शाह को शुक्रवार की बैठक में ही इस इलाके में सीटों की बढ़ोतरी का उपाय तलाशने की चिंता करनी होगी।